ग्रंथसार
क्या तुमने कभी सोचा है देवरात, कि द्वारका का द्वार केवल पत्थर का बना एक मार्ग है या हमारे भीतर के असीम का कोई संकेत?
चार धाम · पाठ 4
द्वारका: पश्चिम का द्वार