ग्रंथसार
गुरुदेव, रामेश्वरम की वह पावन भूमि केवल पत्थरों का सेतु नहीं, अपितु भक्ति का वह मार्ग है जो हमें स्वयं से मिलाता है।
चार धाम · पाठ 6
रामेश्वरम: भक्ति का सेतु