ग्रंथसार
अहंकार के गर्व को ध्वस्त कर जब देवता यह समझते हैं कि उनकी विजय स्वयं उनकी नहीं, अपितु उस परम ब्रह्म की शक्ति का फल है, तभी उन्हें वास्तविक सत्य का बोध होता है।
केन उपनिषद् · उपनिषद् 12
परम सत्ता की आधारशिला