ग्रंथसार
अहंकार के अंधकार में डूबे देवताओं के समक्ष ज्ञान की साक्षात ज्योति का दिव्य अवतरण।
केन उपनिषद् · उपनिषद् 8
उमा का दिव्य प्राकट्य