ग्रंथसार
ओंकार के नाद में सिमटा है संपूर्ण अस्तित्व, जहाँ काल और चेतना का मिलन होता है।
माण्डूक्य उपनिषद् · उपनिषद् 1
एक अक्षर में समाहित अनंत