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माण्डूक्य उपनिषद्
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माण्डूक्य उपनिषद्

12 उपनिषद् · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

माण्डूक्य उपनिषद्

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  1. ॐएक अक्षर में समाहित अनंतउपनिषद् 1
  2. ॐवाणी और जगत का मूलउपनिषद् 2
  3. ॐजागृत अवस्था का रहस्यउपनिषद् 3
  4. ॐस्वप्न लोक की यात्राउपनिषद् 4
  5. ॐगहन सुषुप्ति का विश्रामउपनिषद् 5
  6. ॐतुरीय: तीन से परेउपनिषद् 6
  7. ॐअनिर्वचनीय तुरीयउपनिषद् 7
  8. ॐओमकार के तीन आयामउपनिषद् 8
  9. ॐमौन ही तुरीय की चतुर्थ मात्राउपनिषद् 9
  10. ॐअभय का उदयउपनिषद् 10
  11. ॐसमय के दर्पण में उपनिषदउपनिषद् 11
  12. ॐपूर्णता की ओर: अंतिम बोधउपनिषद् 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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