ग्रंथसार
ॐकार का रहस्य ही संपूर्ण ब्रह्मांड का स्पंदन और आत्म-बोध का द्वार है।
माण्डूक्य उपनिषद् · उपनिषद् 2
वाणी और जगत का मूल