ग्रंथसार
स्वप्न और जागृति की हलचल से परे, आत्मा की वह शांत अवस्था जहाँ न कोई इच्छा शेष है और न कोई दृश्य, वही सुषुप्ति का मौन है।
माण्डूक्य उपनिषद् · उपनिषद् 5
गहन सुषुप्ति का विश्राम