ग्रंथसार
युद्ध के कोलाहल के बीच भी कार्तिकेय का हृदय ज्ञान की शांत और निर्मल धारा बहाता है।
स्कन्द उपपुराण · अध्याय 7
सेनापति के दिव्य उपदेश