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12 अध्याय · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐकार्तिकेय का दिव्य प्राकट्यअध्याय 1
  2. ॐयोद्धा का प्रशिक्षण और विकासअध्याय 2
  3. ॐसेनापतित्व का आह्वानअध्याय 3
  4. ॐतारकासुर का वधअध्याय 4
  5. ॐपवित्र तीर्थों की यात्राअध्याय 5
  6. ॐगणों की स्थापनाअध्याय 6
  7. ॐसेनापति के दिव्य उपदेशअध्याय 7
  8. ॐभगवान का पवित्र भूगोलअध्याय 8
  9. ॐशाश्वत रक्षात्मक उपस्थितिअध्याय 9
  10. ॐभक्ति का सुफलअध्याय 10
  11. ॐआध्यात्मिक अनुशासन का मार्गअध्याय 11
  12. ॐअनंत कृपा और एकात्मताअध्याय 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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