ग्रंथसार
संकट के हर मोड़ पर कार्तिकेय की करुणा एक अभेद्य कवच बनकर भक्त के साथ रहती है।
स्कन्द उपपुराण · अध्याय 9
शाश्वत रक्षात्मक उपस्थिति