ग्रंथसार
वरुण देव की सूक्ष्म दृष्टि हमारे हृदय के उन कोनों को भी प्रकाशित कर देती है जहाँ विचार पनपते हैं।
वरुण पुराण · अध्याय 8
अदृश्य साक्षी