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वरुण पुराण
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वरुण पुराण

12 अध्याय · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

वरुण पुराण

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  1. ॐब्रह्मांडीय जल का विस्तारअध्याय 1
  2. ॐब्रह्मांडीय शपथ के रक्षकअध्याय 2
  3. ॐआंतरिक आत्मा का शुद्धिकरणअध्याय 3
  4. ॐदिव्य प्रवाह की नदियाँअध्याय 4
  5. ॐसत्य की शपथअध्याय 5
  6. ॐअनंत करुणा का सागरअध्याय 6
  7. ॐऋत के सूत्रधारअध्याय 7
  8. ॐअदृश्य साक्षीअध्याय 8
  9. ॐशपथ का शुद्धिकरणअध्याय 9
  10. ॐजल का लौकिक अनुशासनअध्याय 10
  11. ॐवचनों की अखंडताअध्याय 11
  12. ॐपरम शुद्धि का मार्गअध्याय 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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