ग्रंथसार
समय केवल घड़ियों की सुइयों का चलना नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की उस विराट लय का स्पंदन है जो भीतर और बाहर एक समान गूंजती है।
नित्य और मासिक पर्व · पाठ 1
पक्ष का स्पंदन