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नित्य और मासिक पर्व
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नित्य और मासिक पर्व

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

नित्य और मासिक पर्व

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  1. ॐपक्ष का स्पंदनपाठ 1
  2. ॐएकादशी और प्रदोष का महात्म्यपाठ 2
  3. ॐपूर्णिमा और अमावस्या: पूर्णता और रिक्तता का बोधपाठ 3
  4. ॐसाप्ताहिक अनुशासन और देवतापाठ 4
  5. ॐसंकष्टी और मासिक व्रत का अनुष्ठानपाठ 5
  6. ॐअमावस्या और पितृ ऋण की स्मृतिपाठ 6
  7. ॐमासिक अनुष्ठान और गृहस्थ का संतुलनपाठ 7
  8. ॐसंपूर्ण वर्ष: एक अखंड आध्यात्मिक यात्रापाठ 8
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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