ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि चंद्रमा की घटती-बढ़ती कलाएँ वास्तव में हमारे मन की लय को कैसे नियंत्रित करती हैं?
नित्य और मासिक पर्व · पाठ 3
पूर्णिमा और अमावस्या: पूर्णता और रिक्तता का बोध