यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।
परिचय
करुणा वह भाव है जिसमें दूसरे का दुःख देखकर हृदय द्रवित होता है और सहायता की इच्छा जागती है। लगभग सभी परम्पराओं में इसे मनुष्यता की कसौटी कहा गया है।
सरल अर्थ
सरल भाषा में — दया केवल अनुभव है, करुणा वह अनुभव है जो हाथ बढ़ाता है।
जिज्ञासु और सन्त
जिज्ञासु पूछता है — करुणा और कमज़ोरी में भेद कैसे करें?
सन्त कहते हैं — कमज़ोरी दुःख देखकर मुँह फेर लेती है, करुणा पास बैठ जाती है। करुणा में भय नहीं होता, स्थिरता होती है।
ध्यान देने योग्य बातें
- करुणा का पहला रूप — किसी को अपने वचन से भी दुःख न देना।
- सेवा करुणा का व्यावहारिक रूप मानी गई है।
- करुणा में करने वाले का अहंकार नहीं टिकता।
सावधानी
भिन्न परम्पराएँ करुणा को अपने शब्दों और अभ्यासों में रखती हैं।

