ग्रंथसार
संरचना
हर परम्परा उसकी अपनी श्रेणियों में सजाई गई है — किसी एक ढाँचे में जबरन नहीं।
नीचे की संरचना परम्परा की अपनी श्रेणियों पर आधारित है — श्रुति और स्मृति, षड्दर्शन, प्रमुख सम्प्रदाय, साधनाएँ, दिव्य स्वरूप, कथाएँ, आचार्य, अवधारणाएँ, पर्व, तीर्थ और अध्ययन-यात्राएँ।