
ऋग्वेद
देवताओं की स्तुति के मन्त्र
- विषय
- स्तुति-मन्त्र
- संरचना
- १० मण्डल
- ऋत्विज
- होता
ग्रंथसारराधे राधे
आज भी कुछ दिव्य पढ़ें और सुनें
आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित श्रीराम की धर्मयात्रा और आदर्श जीवन का महाकाव्य।
7 काण्ड · 645 सर्ग
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं।
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एक के बाद एक क्रमबद्ध अध्याय
एक साथ जुड़े हुए पाठ
वृन्दावनश्री प्रेमानन्द जी महाराजवह संत जो संसार को राधा नाम में जीवन का अर्थ समझा रहे हैं
हरिद्वारस्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराजहिमालय की साधना से जूना अखाड़े के आचार्य बनने तक का सफर
कैंची धामश्री नीम करोली महाराज जीएक कंबल ओढ़ने वाले महाराज जी, जिनकी याद में आज भी हज़ारों लोग कैंची धाम पहुँचते हैं
तिरुवन्नामलैभगवान श्री रमण महर्षिवह संत जिन्होंने सिखाया कि ईश्वर की खोज से पहले स्वयं को जानो
बंगाल से हरिद्वार तकश्री आनन्दमयी माँएक साधिका जिनके जीवन ने अनेक लोगों को भक्ति की ओर प्रेरित किया
11रोज़ का ज्ञान
9कथा संसार
4चार वेद
12उपनिषद्
1भगवद्गीता
7रामायण
12महाभारत
7रामचरितमानस
12पुराण
12उपपुराण
8षड्दर्शन
4धर्मशास्त्र
4सूत्र साहित्य
6अन्य उपनिषद्
6शास्त्र
8देवता और दिव्य स्वरूप
6तीर्थ
12पर्व और त्योहार
6प्रमुख सम्प्रदाय
12संत, ऋषि और आचार्य
12योग और साधना
5संस्कृति के चरित्र और घटनाएँ
5धर्म परम्परा का इतिहास
5संस्कृति और कथा परम्परा
5नीति शास्त्र
7अवधारणाएँ और दर्शन
9लोक धरोहर
3नीम करोली महाराज जीविषय के अनुसार चुने हुए पाठ