ज्ञान

विषय

ज्ञान

ज्ञान — जानकारी नहीं, पहचान।

यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।

परिचय

परम्परा में सूचना और ज्ञान का भेद बार-बार बताया गया है। जो पढ़ा-सुना जाए वह सूचना, और जो जीवन में उतर जाए वह ज्ञान।

सरल अर्थ

सरल भाषा में — दीपक का नाम जानना सूचना है, अँधेरा मिटना ज्ञान है।

जिज्ञासु और सन्त

जिज्ञासु पूछता है — इतना पढ़ने पर भी मन शान्त क्यों नहीं?

सन्त कहते हैं — पढ़ा हुआ स्मृति में रहता है, समझा हुआ आचरण में उतरता है। एक ही बात को जीकर देखो, सौ पुस्तकों का भार हलका हो जाएगा।

ध्यान देने योग्य बातें

  • श्रवण, मनन और अनुभव — परम्परा में सीखने के तीन चरण।
  • विवेक का अर्थ — नित्य और अनित्य का भेद पहचानना।
  • ज्ञान का चिह्न माना गया — अहंकार का घटना।

सावधानी

दार्शनिक विवरण मतभेदपूर्ण हैं; यहाँ सामान्य समझ भर है।

इसी विषय पर पुस्तकालय में पढ़ें