यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।
परिचय
परम्परा में सूचना और ज्ञान का भेद बार-बार बताया गया है। जो पढ़ा-सुना जाए वह सूचना, और जो जीवन में उतर जाए वह ज्ञान।
सरल अर्थ
सरल भाषा में — दीपक का नाम जानना सूचना है, अँधेरा मिटना ज्ञान है।
जिज्ञासु और सन्त
जिज्ञासु पूछता है — इतना पढ़ने पर भी मन शान्त क्यों नहीं?
सन्त कहते हैं — पढ़ा हुआ स्मृति में रहता है, समझा हुआ आचरण में उतरता है। एक ही बात को जीकर देखो, सौ पुस्तकों का भार हलका हो जाएगा।
ध्यान देने योग्य बातें
- श्रवण, मनन और अनुभव — परम्परा में सीखने के तीन चरण।
- विवेक का अर्थ — नित्य और अनित्य का भेद पहचानना।
- ज्ञान का चिह्न माना गया — अहंकार का घटना।
सावधानी
दार्शनिक विवरण मतभेदपूर्ण हैं; यहाँ सामान्य समझ भर है।

