यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।
परिचय
मोक्ष की व्याख्या परम्पराओं में भिन्न है, पर सामान्य समझ यह रही है कि यह किसी स्थान पर पहुँचना नहीं, बन्धन के कारण का मिटना है।
सरल अर्थ
सरल भाषा में — गाँठ खुल जाए तो रस्सी वहीं रहती है, बन्धन नहीं रहता।
जिज्ञासु और सन्त
जिज्ञासु पूछता है — मोक्ष मरने के बाद मिलता है?
सन्त कहते हैं — कुछ मत यही कहते हैं, कुछ जीवित रहते ही मुक्त होने की बात करते हैं। इस पर परम्पराओं में एक मत नहीं, और यह भेद छिपाना उचित नहीं।
ध्यान देने योग्य बातें
- भक्ति-मार्ग, ज्ञान-मार्ग और योग-मार्ग — भिन्न वर्णन।
- कुछ दर्शन जीवनमुक्ति की बात करते हैं।
- यह विषय दार्शनिक विवाद का केन्द्र रहा है।
सावधानी
मतभेद वास्तविक हैं; यहाँ किसी मत को श्रेष्ठ नहीं कहा गया।

