सत्य

विषय

सत्य

सत्य — जो है, उसे वैसा ही स्वीकारना और कहना।

यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।

परिचय

सत्य का अर्थ केवल झूठ न बोलना नहीं; जो है उसे देखने का साहस भी है। परम्परा में सत्य को तप के समान कहा गया है।

सरल अर्थ

सरल भाषा में — सत्य कठिन तब होता है जब वह हमारे विरुद्ध हो।

जिज्ञासु और सन्त

जिज्ञासु पूछता है — जिस सत्य से किसी का अहित हो, वह भी कहें?

सन्त कहते हैं — सत्य के साथ करुणा जुड़ी रहे तो वह घाव नहीं, औषधि बनता है। कहने का समय और ढंग भी सत्य का अंग है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • सत्य वाणी का ही नहीं, व्यवहार का भी विषय है।
  • अपने विषय में सत्य देखना सबसे कठिन माना गया।
  • सत्य और कठोरता में भेद परम्परा ने बार-बार बताया।

सावधानी

यह सामान्य परिचय है; शास्त्रीय विवेचन विस्तृत और भिन्न-भिन्न है।

इसी विषय पर पुस्तकालय में पढ़ें