यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।
परिचय
श्रद्धा का अर्थ आँख बन्द करके मान लेना नहीं; परम्परा में इसे वह भाव कहा गया जिससे सुनने और समझने की भूमि तैयार होती है।
सरल अर्थ
सरल भाषा में — बीज बोने से पहले भूमि नरम करनी पड़ती है; श्रद्धा वही नरमी है।
जिज्ञासु और सन्त
जिज्ञासु पूछता है — श्रद्धा और अन्धविश्वास में भेद क्या है?
सन्त कहते हैं — श्रद्धा प्रश्न से नहीं डरती, अन्धविश्वास प्रश्न से भागता है। जो जाँचकर टिकता है, वही विश्वास कहलाने योग्य है।
ध्यान देने योग्य बातें
- श्रद्धा और जिज्ञासा साथ चल सकती हैं।
- श्रद्धा का दुरुपयोग परम्परा में भी चिन्ता का विषय रहा।
- प्रमाण माँगना अश्रद्धा नहीं।
सावधानी
इस पुस्तकालय में कोई चमत्कार-दावा प्रमाणित नहीं माना जाता।

