श्रद्धा

विषय

श्रद्धा

श्रद्धा — सीखने के लिए खुला हुआ मन।

यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।

परिचय

श्रद्धा का अर्थ आँख बन्द करके मान लेना नहीं; परम्परा में इसे वह भाव कहा गया जिससे सुनने और समझने की भूमि तैयार होती है।

सरल अर्थ

सरल भाषा में — बीज बोने से पहले भूमि नरम करनी पड़ती है; श्रद्धा वही नरमी है।

जिज्ञासु और सन्त

जिज्ञासु पूछता है — श्रद्धा और अन्धविश्वास में भेद क्या है?

सन्त कहते हैं — श्रद्धा प्रश्न से नहीं डरती, अन्धविश्वास प्रश्न से भागता है। जो जाँचकर टिकता है, वही विश्वास कहलाने योग्य है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • श्रद्धा और जिज्ञासा साथ चल सकती हैं।
  • श्रद्धा का दुरुपयोग परम्परा में भी चिन्ता का विषय रहा।
  • प्रमाण माँगना अश्रद्धा नहीं।

सावधानी

इस पुस्तकालय में कोई चमत्कार-दावा प्रमाणित नहीं माना जाता।

इसी विषय पर पुस्तकालय में पढ़ें