वैराग्य

विषय

वैराग्य

वैराग्य — छोड़ना नहीं, बँधना बन्द कर देना।

यह पृष्ठ संपादकीय सरल परिचय है — मूल श्लोक, अनुवाद या उद्धरण नहीं। किसी पंक्ति को शास्त्र-वचन न मानें।

परिचय

वैराग्य को अक्सर संसार त्यागना समझा जाता है, पर परम्परा में इसका मुख्य अर्थ आसक्ति का घटना है — वस्तु पास रहे, पकड़ ढीली हो।

सरल अर्थ

सरल भाषा में — नाव पानी में रहे, पानी नाव में न आए।

जिज्ञासु और सन्त

जिज्ञासु पूछता है — गृहस्थ में वैराग्य कैसे सम्भव है?

सन्त कहते हैं — घर छोड़ना सरल है, मोह छोड़ना कठिन। जो अपने कर्तव्य निभाते हुए फल पर पकड़ ढीली रखता है, वही गृहस्थ विरक्त है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • वैराग्य का चिह्न — अभाव में भी अशान्ति न होना।
  • भोग से भागना और भोग में न उलझना — दो अलग स्थितियाँ।
  • परम्परा में विवेक के बाद वैराग्य का क्रम बताया गया।

सावधानी

साधना-सम्बन्धी बातें योग्य मार्गदर्शन में ही ठीक से समझी जाती हैं।

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