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श्रुति काल

8 पाठ · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

श्रुति काल

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  1. ॐमौखिक परंपरा का श्वासपाठ 1
  2. ॐवैदिक भजनों का संसारपाठ 2
  3. ॐअनुष्ठान साहित्य का युगपाठ 3
  4. ॐआरण्यक: वन की शांतिपाठ 4
  5. ॐउपनिषद: भीतर की ओर मुड़नापाठ 5
  6. ॐअनुष्ठान से जिज्ञासा की ओरपाठ 6
  7. ॐपाठ और परंपरा की शाखाएंपाठ 7
  8. ॐअनिश्चितताओं का बोधपाठ 8
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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