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किष्किन्धाकाण्ड
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किष्किन्धाकाण्ड

8 Prasang · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

किष्किन्धाकाण्ड

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  1. ॐमिलन और मित्रताPrasang 1
  2. ॐबाली का अंत और किष्किन्धा का शासनPrasang 2
  3. ॐदक्षिण की खोज और संपाती का मार्गदर्शनPrasang 3
  4. ॐसुग्रीव का राज्याभिषेक और समय का बीतनाPrasang 4
  5. ॐखोज दलों का गठन और प्रस्थानPrasang 5
  6. ॐसंपाती का मार्गदर्शन और दक्षिण तटPrasang 6
  7. ॐहनुमान का पराक्रम और लंका की ओर दृष्टिPrasang 7
  8. ॐअंतिम संकल्प और तट पर समागमPrasang 8
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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