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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

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  1. ॐआयु का ज्ञानपाठ 1
  2. ॐस्वास्थ्य का संतुलनपाठ 2
  3. ॐत्रिदोष का सिद्धांतपाठ 3
  4. ॐधातु और अग्नि का सारपाठ 4
  5. ॐदिनचर्या और ऋतुचर्या का तालमेलपाठ 5
  6. ॐआहार का गुण और गुणवत्तापाठ 6
  7. ॐनिद्रा और संयम: विश्राम की वास्तुकलापाठ 7
  8. ॐअष्टांग आयुर्वेद: ज्ञान का विस्तारपाठ 8
  9. ॐग्रंथ परंपरा: ज्ञान का संचयपाठ 9
  10. ॐवैद्य की निष्ठा और रोगी का विश्वासपाठ 10
  11. ॐरसायन और दीर्घायु की अभिलाषापाठ 11
  12. ॐआधुनिक पाठक के लिए आयुर्वेद का संदेशपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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