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वैष्णव सम्प्रदाय

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सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

वैष्णव सम्प्रदाय

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  1. ॐविष्णु का व्यापक स्वरूपपाठ 1
  2. ॐपरंपरा के आलोक में अवतारपाठ 2
  3. ॐशरणागति का मार्गपाठ 3
  4. ॐभक्ति और नाम-स्मरण का महात्म्यपाठ 4
  5. ॐमंदिर-पूजा और जीवन की लयपाठ 5
  6. ॐभजन और गायन की परंपरापाठ 6
  7. ॐमहान आचार्य: कृपा की अखंड परंपरापाठ 7
  8. ॐविविध संप्रदाय: एकता में अनेकतापाठ 8
  9. ॐउत्सव-जीवन: दिव्यता का उत्सवपाठ 9
  10. ॐसेवा का मार्ग: समर्पण की जीवंत साधनापाठ 10
  11. ॐधार्मिक जीवन: आचरण की शुचितापाठ 11
  12. ॐशरणागति: अंतिम लक्ष्यपाठ 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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