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नारद उपपुराण
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नारद उपपुराण

12 अध्याय · पढ़ें और सुनें

सम्पादकीय कथा-रूपान्तरण — मूल शास्त्र-पाठ नहीं

नारद उपपुराण

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  1. ॐनारद का आगमनअध्याय 1
  2. ॐभक्ति का स्वरूपअध्याय 2
  3. ॐसत्संग का महत्त्वअध्याय 3
  4. ॐकीर्तन की महिमाअध्याय 4
  5. ॐसेवा का फलअध्याय 5
  6. ॐआंतरिक शांति का मार्गअध्याय 6
  7. ॐभक्ति का प्रकाशअध्याय 7
  8. ॐस्मरण का रसायनअध्याय 8
  9. ॐविवेक का उदयअध्याय 9
  10. ॐसत्संग का माधुर्यअध्याय 10
  11. ॐनिरंतर स्मरण की प्रभाअध्याय 11
  12. ॐभक्ति का अंतिम आश्रयअध्याय 12
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सम्पादकीय सिद्धान्त

मूल स्रोत, अनुवाद, सरल व्याख्या और परम्परागत टीका सदा अलग-अलग अंकित रहते हैं। कुछ भी गढ़ा नहीं जाता; अनुपलब्ध सामग्री को अनुपलब्ध अंकित किया जाता है।

सम्पादकीय कथाएँ इसी रूप में अंकित हैं और शास्त्र नहीं हैं। किसी परम्परा को दूसरी से ऊँचा नहीं बताया जाता।

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