स्मृति · इतिहास · रामायण

बालकाण्ड

The first Kanda of the Ramayana, shown with its native terminology.

काण्ड 12 Sargas

सर्ग

77 सर्ग — पढ़ें और सुनें

सर्ग 1

नारद का उत्तर

सर्ग 2

शोक से श्लोक

सर्ग 3

समग्र दर्शन

सर्ग 4

कुश और लव का गान

सर्ग 5

सरयू तट की नगरी

सर्ग 6

प्रजा का आचरण

सर्ग 7

राजा के मंत्री

सर्ग 8

राजा का संकल्प

सर्ग 9

सुमन्त्र की स्मृति

सर्ग 10

वन का ऋषिकुमार

सर्ग 11

अंग देश की यात्रा

सर्ग 12

अश्व का प्रस्थान

सर्ग 13

अतिथियों का आगमन

सर्ग 14

यज्ञ की पूर्णता

सर्ग 15

देवताओं की प्रार्थना

सर्ग 16

सहायकों की रचना

सर्ग 17

अग्नि से प्राप्त प्रसाद

सर्ग 18

चार पुत्र और द्वार पर ऋषि

सर्ग 19

विश्वामित्र की माँग

सर्ग 20

पिता का इनकार

सर्ग 21

ऋषि का क्रोध

सर्ग 22

वसिष्ठ का वचन

सर्ग 23

सरयू तट की पहली रात

सर्ग 24

सूनी भूमि

सर्ग 25

ताड़का की कथा

सर्ग 26

मार्ग खुला

सर्ग 27

अस्त्रों का दान

सर्ग 28

सिद्धाश्रम की ओर

सर्ग 29

अनुष्ठान का आरम्भ

सर्ग 30

यज्ञ की रक्षा

सर्ग 31

मिथिला की ओर

सर्ग 32

सौ कन्याएँ

सर्ग 33

विवाह से स्वस्थ

सर्ग 34

शोण के तट की रात

सर्ग 35

हिमवान की दो पुत्रियाँ

सर्ग 36

कार्तिकेय का जन्म

सर्ग 37

देवसेनापति

सर्ग 38

सगर के पुत्र

सर्ग 39

पृथ्वी का खनन

सर्ग 40

गहराई में भस्म

सर्ग 41

अंशुमान की वापसी

सर्ग 42

भगीरथ का तप

सर्ग 43

अवतरण

सर्ग 44

ब्रह्मा का वचन

सर्ग 45

समुद्र-मन्थन

सर्ग 46

दिति का व्रत

सर्ग 47

मरुतों का जन्म

सर्ग 48

सूना आश्रम

सर्ग 49

अहल्या का उद्धार

सर्ग 50

मिथिला में प्रवेश

सर्ग 51

शतानन्द का प्रश्न

सर्ग 52

वसिष्ठ के आश्रम की गाय

सर्ग 53

विश्वामित्र का प्रलोभन और शबला का बलपूर्वक हरण

सर्ग 54

शबला द्वारा दिव्य सेना की सृष्टि

सर्ग 55

विश्वामित्र की शिव-तपस्या और वशिष्ठ-आश्रम पर आक्रमण

सर्ग 56

ब्रह्मदण्ड की विजय और विश्वामित्र का महासंकल्प

सर्ग 57

राजा त्रिशंकु का सदेह स्वर्ग जाने का संकल्प

सर्ग 58

विश्वामित्र द्वारा त्रिशंकु को अभयदान

सर्ग 59

विश्वामित्र का क्रोध और वशिष्ठ-पुत्रों को शाप

सर्ग 60

त्रिशंकु स्वर्ग और विश्वामित्र का नवीन ब्रह्मांड

सर्ग 61

अम्बरीष का यज्ञ और शुनःशेप की व्यथा

सर्ग 62

शुनःशेप की मुक्ति और विश्वामित्र की तपस्या

सर्ग 63

विश्वामित्र की तपस्या, मेनका का आगमन और काम-विजय का संकल्प

सर्ग 64

रम्भा को शाप और विश्वामित्र का दृढ़ संकल्प

सर्ग 65

विश्वामित्र को ब्रह्मर्षि पद की प्राप्ति

सर्ग 66

दिव्य धनुष की गाथा और सीता जी का प्राकट्य

सर्ग 67

शिव-धनुष भंजन

सर्ग 68

जनक के दूतों का अयोध्या आगमन

सर्ग 69

महाराज दशरथ का मिथिला प्रस्थान

सर्ग 70

महर्षि वशिष्ठ द्वारा इक्ष्वाकु वंश का कीर्तन

सर्ग 71

राजा जनक द्वारा विदेह वंश की वंशावली का वर्णन

सर्ग 72

चारों राजकुमारों के विवाह का शुभ निर्णय

सर्ग 73

चारों राजकुमारों का पाणिग्रहण संस्कार

सर्ग 74

परशुराम का प्राकट्य

सर्ग 75

श्रीराम द्वारा वैष्णव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना

सर्ग 76

श्रीराम द्वारा वैष्णव धनुष का संधान

सर्ग 77

अयोध्या में भव्य प्रवेश एवं राजकुमारों का गृहस्थ सुख

अध्याय

Sargas in Bala Kanda

सर्ग 1

प्रथमः सर्गः

सर्ग 2

द्वितीयः सर्गः