
स्मृति · इतिहास · रामायण
उत्तरकाण्ड
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सर्ग
111 सर्ग — पढ़ें और सुनें

सर्ग 1
महर्षियों का अयोध्या आगमन

सर्ग 2
पुलस्त्य वंश और विश्रवा का जन्म

सर्ग 3
राक्षसों की उत्पत्ति और सुकेश का प्राकट्य

सर्ग 4
राक्षस कुल की उत्पत्ति और सुकेश पर कृपा

सर्ग 5
राक्षस वंश का विस्तार और देवताओं की श्रीविष्णु से प्रार्थना

सर्ग 6
देवताओं की भगवान विष्णु से प्रार्थना

सर्ग 7
माल्यावान, सुमाली और माली का उत्कर्ष तथा लंका में प्रवेश

सर्ग 8
भगवान विष्णु और राक्षस सेना का घमासान युद्ध

सर्ग 9
रावण और उसके भ्राताओं का जन्म

सर्ग 10
राक्षस बन्धुओं का जन्म और घोर तपस्या

सर्ग 11
रावण का लंका पर अधिकार और कुबेर का कैलास गमन

सर्ग 12
राक्षस भाइयों का विवाह और मेघनाद का जन्म

सर्ग 13
राक्षसों का विवाह और मेघनाद का जन्म

सर्ग 14

सर्ग 15
रावण और यक्षों का भीषण युद्ध

सर्ग 16
रावण द्वारा कैलास पर्वत उठाना और नामकरण

सर्ग 17

सर्ग 18
राजा मरुत्त का यज्ञ और देवों का पशु-पक्षी रूप धारण करना

सर्ग 19
रावण और राजा अनरण्य का युद्ध

सर्ग 20
निवातकवचों के साथ रावण की सन्धि

सर्ग 21

सर्ग 22
यमराज और रावण का युद्ध तथा ब्रह्मा जी का हस्तक्षेप

सर्ग 23
वरुणलोक में रावण का अभियान

सर्ग 24
अपहृत स्त्रियों का शाप और शूर्पणखा का विलाप

सर्ग 25
शूर्पणखा का विलाप और जनस्थान की स्थापना

सर्ग 26
नलकूबर द्वारा रावण को शाप

सर्ग 27

सर्ग 28
सुमाली का वध और मेघनाद का रणभूमि में प्रवेश

सर्ग 29
मेघनाद द्वारा इन्द्र का बन्धन

सर्ग 30
इन्द्रजित् का वरदान और इन्द्र की मुक्ति

सर्ग 31
नर्मदा तट पर रावण की पूजा और जल का उफान

सर्ग 32
कार्तवीर्य अर्जुन द्वारा रावण की पराजय और बन्धन

सर्ग 33
महर्षि पुलस्त्य द्वारा रावण की मुक्ति

सर्ग 34
वालि द्वारा रावण का मान-मर्दन

सर्ग 35
हनुमान जी का जन्म और पवनदेव का कोप

सर्ग 36
ऋषियों का शाप और मुनियों की विदाई

सर्ग 37
ऋषियों की विदाई और आशीर्वाद

सर्ग 38
जनक, युधाजित और प्रतर्दन की विदाई

सर्ग 39
वानरों और विभीषण का सत्कार

सर्ग 40
वानरों और विभीषण की विदाई

सर्ग 41

सर्ग 42
अशोक वाटिका में श्रीराम-सीता और सीता जी का मनोरथ

सर्ग 43
भद्र द्वारा लोकापवाद का निवेदन

सर्ग 44
श्रीराम द्वारा भ्राताओं का आह्वान और शोक

सर्ग 45

सर्ग 46
सीता का वन की ओर प्रस्थान

सर्ग 47
महर्षि वाल्मीकि द्वारा सीता को आश्रम में आश्रय

सर्ग 48
लक्ष्मण द्वारा सीता को त्याग का सत्य बताना

सर्ग 49
सुमन्त्र द्वारा लक्ष्मण को सान्त्वना और दुर्वासा की भविष्यवाणी

सर्ग 50
सुमन्त्र द्वारा लक्ष्मण को सान्त्वना एवं दुर्वासा की भविष्यवाणी

सर्ग 51
लक्ष्मण द्वारा श्री राम को सांत्वना और राजधर्म का स्मरण

सर्ग 52
लक्ष्मण का अयोध्या लौटना और श्रीराम को सांत्वना

सर्ग 53

सर्ग 54
राजा नृग का शाप और मुक्ति का वृत्तांत

सर्ग 55
राजा नृग का शाप-भोग और उद्धार का वरदान

सर्ग 56
वसिष्ठ का पुनर्जन्म और राजा निमि का वंश

सर्ग 57

सर्ग 58
राजा इल का स्त्री-रूप में परिवर्तन

सर्ग 59

सर्ग 60
महर्षि च्यवन और यमुना तट के ऋषियों का आगमन

सर्ग 61
लवणासुर के वध हेतु श्री राम का परामर्श

सर्ग 62
मधु के त्रिशूल की उत्पत्ति की कथा

सर्ग 63
वाल्मीकि आश्रम में शत्रुघ्न द्वारा रामकथा का श्रवण

सर्ग 64
महर्षि च्यवन द्वारा लवणासुर के त्रिशूल का वर्णन

सर्ग 65
शत्रुघ्न का महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में आगमन

सर्ग 66
आश्रम में शत्रुघ्न द्वारा श्रीराम-चरित का श्रवण

सर्ग 67
शत्रुघ्न और लवणासुर का आमना-सामना

सर्ग 68

सर्ग 69
मधुपुरी की स्थापना और उसका वैभव

सर्ग 70
शत्रुघ्न का महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में आगमन

सर्ग 71
शत्रुघ्न का लवणासुर-वध हेतु संकल्प

सर्ग 72
शत्रुघ्न का अयोध्या आगमन और श्रीराम से मिलन

सर्ग 73
विप्र-पुत्र का देहावसान और राजसभा

सर्ग 74
देवर्षि नारद द्वारा अकाल मृत्यु का कारण-वर्णन

सर्ग 75
श्रीराम द्वारा तपस्वी की खोज और शैवल पर्वत पर आगमन

सर्ग 76
दण्ड के राज्य का विनाश और प्रभात का आगमन

सर्ग 77
श्रीराम का अगस्त्य आश्रम गमन और दिव्य आभूषण की प्राप्ति

सर्ग 78

सर्ग 79
महर्षि शुक्राचार्य का शाप

सर्ग 80
बुध और इला का मिलन तथा पुरूरवा की उत्पत्ति

सर्ग 81
शुक्राचार्य द्वारा राजा दण्ड को शाप

सर्ग 82
राजा इल का अश्वमेध और यज्ञ की महिमा

सर्ग 83
लक्ष्मण द्वारा अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव

सर्ग 84
राजा इल का स्त्री-रूप में परिवर्तन

सर्ग 85
अश्वमेध द्वारा इन्द्र की ब्रह्महत्या से मुक्ति

सर्ग 86
राजा इल का शाप-मुक्ति और अश्वमेध

सर्ग 87
राजा इल का आख्यान और रूप-परिवर्तन

सर्ग 88
श्रीराम का अश्वमेध यज्ञ का संकल्प

सर्ग 89
नैमिषारण्य में अश्वमेध यज्ञ की भव्य तैयारियाँ

सर्ग 90
श्रीराम द्वारा अश्वमेध यज्ञ का संकल्प

सर्ग 91
अश्वमेध यज्ञ की भव्य तैयारियाँ

सर्ग 92
वाल्मीकि द्वारा कुश और लव को निर्देश

सर्ग 93
वाल्मीकि द्वारा लव और कुश को उपदेश

सर्ग 94
श्रीराम की सभा में लव और कुश का रामायण-गान

सर्ग 95
महर्षि वाल्मीकि द्वारा सीता की शुचिता का साक्ष्य

सर्ग 96
वाल्मीकि द्वारा सीता की शुद्धि की घोषणा

सर्ग 97
सीता की प्रतिज्ञा और भू-प्रवेश

सर्ग 98
श्रीराम का विलाप और ब्रह्मा जी का प्रबोधन

सर्ग 99
यज्ञ की पूर्णाहुति तथा अयोध्या वापसी

सर्ग 100
राजा युधाजित् का संदेश और भरत का प्रस्थान

सर्ग 101
लक्ष्मण के पुत्रों का राज्याभिषेक

सर्ग 102
अंगद और चन्द्रकेतु का राज्याभिषेक

सर्ग 103
काल का आगमन और ब्रह्म-सन्देश

सर्ग 104

सर्ग 105
महर्षि दुर्वासा का आगमन और लक्ष्मण का त्याग

सर्ग 106
लक्ष्मण का त्याग और महाप्रयाण

सर्ग 107
कुश और लव का राज्याभिषेक तथा श्रीराम का महाप्रस्थान का संकल्प

सर्ग 108
श्रीराम द्वारा सहयोगियों को विदाई एवं महाप्रस्थान की तैयारी

सर्ग 109

सर्ग 110
भगवान श्रीराम का परमधाम गमन

सर्ग 111
रामायण-श्रवण का दिव्य फल और माहात्म्य
सामग्री
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