स्मृति · इतिहास · महाभारत

भीष्मपर्व

अध्याय › प्रसंगसंरचना श्रेणी — प्रकाशन के साथ सामग्री जुड़ती जाएगी

अध्याय

117 अध्याय — पढ़ें और सुनें

अध्याय 1

संजय का हस्तिनापुर आगमन

अध्याय 2

धृतराष्ट्र का विलाप

अध्याय 3

सेनाओं का व्यूह-रचना

अध्याय 4

अर्जुन का विषाद

अध्याय 5

कर्तव्य का बोध

अध्याय 6

महायुद्ध का शंखनाद

अध्याय 7

पितामह का रणकौशल

अध्याय 8

भीष्म का शरशैया की ओर प्रस्थान

अध्याय 9

प्रथम दिवस का महासंग्राम

अध्याय 10

अर्जुन का मोह और विषाद

अध्याय 11

योगेश्वर का दिव्य उपदेश

अध्याय 12

पितामह का अटल संकल्प

अध्याय 13

द्वितीय दिवस का भीषण युद्ध

अध्याय 14

तृतीय दिवस का संहार

अध्याय 15

योगेश्वर का क्रोध और पितामह का वात्सल्य

अध्याय 16

व्यूह और प्रतिव्यूह का संघर्ष

अध्याय 17

चतुर्थ दिवस का भीषण संहार

अध्याय 18

पंचम दिवस: व्यूह का उलझन

अध्याय 19

षष्ठ दिवस: भारी क्षति और विलाप

अध्याय 20

सप्तम दिवस: क्षयकारी युद्ध की रणनीति

अध्याय 21

अष्टम दिवस: इरावन् का बलिदान

अध्याय 22

नवम दिवस: पितामह का रौद्र रूप

अध्याय 23

दशम दिवस: पितामह का पतन

अध्याय 24

विराम और विषाद: पितामह के पतन के उपरांत

अध्याय 25

द्रोणाचार्य का सेनापतित्व

अध्याय 26

युधिष्ठिर को बंदी बनाने का प्रयास

अध्याय 27

व्यूह रचना और युद्ध की भीषणता

अध्याय 28

संसप्तकों का वध और अर्जुन का संकल्प

अध्याय 29

चक्रव्यूह की रचना

अध्याय 30

अभिमन्यु का बलिदान

अध्याय 31

अर्जुन की प्रतिज्ञा

अध्याय 32

जयद्रथ वध

अध्याय 33

कौरव सेना का पुनरुत्थान

अध्याय 34

पांडवों का भीषण प्रतिघात

अध्याय 35

रणनीतिक गतिरोध

अध्याय 36

पितामह का आसन्न पतन

अध्याय 37

नवम दिवस का प्रलय

अध्याय 38

विजय की गुप्त रणनीति

अध्याय 39

दशम दिवस: महाबली का पतन

अध्याय 40

रणभूमि का सन्नाटा

अध्याय 41

शिखंडी का आगमन

अध्याय 42

शरों की शय्या

अध्याय 43

द्रोणाचार्य का सेनापतित्व

अध्याय 44

द्रोण के युद्ध की जटिलता

अध्याय 45

द्रोण की व्यूह रचना

अध्याय 46

युधिष्ठिर को बंदी बनाने का षड्यंत्र

अध्याय 47

अभिमन्यु का अद्भुत शौर्य

अध्याय 48

वीर अभिमन्यु का बलिदान

अध्याय 49

युधिष्ठिर का विलाप

अध्याय 50

अर्जुन की प्रतिज्ञा

अध्याय 51

जयद्रथ वध का मार्ग

अध्याय 52

जयद्रथ का अंत

अध्याय 53

कौरवों में पुनः संचारित उत्साह

अध्याय 54

द्रोणाचार्य की व्यूह रचना

अध्याय 55

पांडवों पर बढ़ता दबाव

अध्याय 56

महायुद्ध का अंतिम सोपान

अध्याय 57

व्यूह और छल का जाल

अध्याय 58

अभिमन्यु का बलिदान

अध्याय 59

अर्जुन की प्रतिज्ञा

अध्याय 60

विश्राम और युद्ध का नया चरण

अध्याय 61

रणनीतिक गतिरोध

अध्याय 62

अराजकता का प्रादुर्भाव

अध्याय 63

पितामह की घटती शक्ति

अध्याय 64

शर-शय्या का गमन

अध्याय 65

भीष्म का अंतिम उपदेश

अध्याय 66

गंगापुत्र की तृष्णा और जल का आगमन

अध्याय 67

दुर्योधन का शोक और विलाप

अध्याय 68

रणभूमि में मौन और सैन्य हलचल

अध्याय 69

दुर्योधन का व्याकुल हृदय

अध्याय 70

द्रोणाचार्य का सेनापतित्व

अध्याय 71

गुरु की रण-नीति

अध्याय 72

बढ़ता हुआ संघर्ष

अध्याय 73

युद्ध का प्रथम प्रहार

अध्याय 74

अर्जुन की विषाद-दशा

अध्याय 75

श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश

अध्याय 76

भीष्म पितामह का शर-शय्या पर पतन

अध्याय 77

कौरवों का शोक

अध्याय 78

द्रोणाचार्य का अभिषेक

अध्याय 79

रणनीति में परिवर्तन

अध्याय 80

बढ़ती हुई निराशा

अध्याय 81

द्रोणाचार्य का संकल्प

अध्याय 82

रणनीतिक संघर्ष

अध्याय 83

पांडवों का प्रत्युत्तर

अध्याय 84

सांध्यकालीन विभीषिका

अध्याय 85

आठवें दिन का भीषण संग्राम

अध्याय 86

नौवें दिन का महाविनाश

अध्याय 87

दसवें दिन का उदय और भीष्म का पतन

अध्याय 88

शर-शैया पर पितामह

अध्याय 89

पितामह का विश्राम

अध्याय 90

सेनापतित्व का नया भार

अध्याय 91

शकट व्यूह का चक्र

अध्याय 92

नियति की परछाइयां

अध्याय 93

द्रोण का संकल्प

अध्याय 94

व्यूह की जटिलता

अध्याय 95

आचार्य का आंतरिक द्वंद्व

अध्याय 96

ढलती हुई सांध्य बेला

अध्याय 97

रणनीति का निर्णायक मोड़

अध्याय 98

शिखंडी का सामना

अध्याय 99

पितामह का शरशय्या पर पतन

अध्याय 100

ढलते सूर्य का शोक

अध्याय 101

शरशय्या पर भीष्म

अध्याय 102

कर्ण का युद्ध में प्रवेश

अध्याय 103

दुर्योधन की नयी व्यूह रचना

अध्याय 104

पांडवों का अडिग संकल्प

अध्याय 105

द्रोणाचार्य का सेनापतित्व

अध्याय 106

युधिष्ठिर को बंदी बनाने का प्रयास

अध्याय 107

प्रागज्योतिषपुर के राजा भगदत्त का वध

अध्याय 108

संसप्तकों का संहार

अध्याय 109

विराट और उत्तर का वध

अध्याय 110

अर्जुन और द्रोण का तुमुल युद्ध

अध्याय 111

श्रीकृष्ण की कूटनीति और मार्गदर्शन

अध्याय 112

युद्ध के अंत की ओर संकेत

अध्याय 113

भीष्म पतन की कूटनीति

अध्याय 114

भीष्म पितामह का पतन

अध्याय 115

दुर्योधन की व्याकुलता और शोक

अध्याय 116

प्रथम चरण का समापन

अध्याय 117

शर-शय्या पर पितामह

अध्याय

भगवद्गीता

अध्याय › प्रसंग