
स्मृति · इतिहास · रामायण
सुन्दरकाण्ड
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सर्ग
68 सर्ग — पढ़ें और सुनें

सर्ग 1

सर्ग 2
हनुमान जी द्वारा लंका का अवलोकन

सर्ग 3
लंका की अधिष्ठात्री देवी लंकिनी की पराजय

सर्ग 4
हनुमान जी द्वारा लंका नगरी का अवलोकन

सर्ग 5
लंका में हनुमानजी का रात्रि-भ्रमण और सीता-खोज

सर्ग 6
रावण के दिव्य प्रासाद में श्रीहनुमान का प्रवेश

सर्ग 7
पुष्पक विमान का दिव्य दर्शन

सर्ग 8
पुष्पक विमान का अद्भुत दर्शन

सर्ग 9
हनुमान जी का रावण के अंतःपुर में प्रवेश

सर्ग 10
मन्दोदरी का दर्शन और हनुमान जी का भ्रम

सर्ग 11
पानभूमि का दृश्य और हनुमान जी का धर्म-चिन्तन

सर्ग 12
हनुमान जी की चिंता और पुनः संकल्प

सर्ग 13
हनुमान जी का विषाद और पुनः संकल्प

सर्ग 14
हनुमान जी का अशोक वाटिका में प्रवेश और अन्वेषण

सर्ग 15
हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका में सीता जी के दर्शन

सर्ग 16
हनुमान जी का शोक और सीता-दर्शन का विचार

सर्ग 17
अशोकवाटिका में राक्षसी पहरेदारों का दर्शन

सर्ग 18
रावण का अशोक वाटिका में आगमन

सर्ग 19
अशोक वाटिका में सीता की व्यथा

सर्ग 20
रावण द्वारा सीता जी को प्रलोभन

सर्ग 21
सीता जी का रावण को निर्भीक उत्तर

सर्ग 22
रावण की अंतिम चेतावनी और सीताजी का निर्भय उत्तर

सर्ग 23
राक्षसियों द्वारा सीता को प्रलोभन व भय दिखाना

सर्ग 24
राक्षसियों द्वारा सीता को भय दिखाना

सर्ग 25
सीता का विलाप और गहन संताप

सर्ग 26
सीता का विलाप और प्राण त्याग का विचार

सर्ग 27

सर्ग 28
सीता का विलाप और प्राण त्यागने का संकल्प

सर्ग 29

सर्ग 30
हनुमान जी का विचार और सम्भाषण का निश्चय

सर्ग 31
हनुमान जी द्वारा श्रीराम-कथा का गान

सर्ग 32
सीताजी द्वारा वृक्ष पर हनुमानजी का दर्शन

सर्ग 33
हनुमान जी और सीता जी का प्रथम संवाद

सर्ग 34
हनुमान जी और सीता जी का प्रथम संवाद

सर्ग 35
हनुमान जी द्वारा श्री राम के स्वरूप और गुणों का वर्णन

सर्ग 36
मुद्रिका-प्रदान और श्रीराम का संदेश

सर्ग 37
हनुमान का सीता को ले जाने का प्रस्ताव और सीता का उत्तर

सर्ग 38
सीता का अभिज्ञान: काकासुर का वृत्तांत और चूड़ामणि का समर्पण

सर्ग 39
हनुमान जी द्वारा माँ सीता को पुनः आश्वासन

सर्ग 40
सीताजी का अंतिम संदेश और हनुमान जी का आश्वासन

सर्ग 41

सर्ग 42
अशोक वाटिका के विध्वंस की सूचना और किंकरों की रवानगी

सर्ग 43

सर्ग 44

सर्ग 45

सर्ग 46

सर्ग 47

सर्ग 48
इन्द्रजीत द्वारा ब्रह्मास्त्र से हनुमान् जी का बन्धन

सर्ग 49
हनुमान जी द्वारा रावण के ऐश्वर्य का दर्शन

सर्ग 50
प्रहस्त द्वारा हनुमान जी से प्रश्न

सर्ग 51
हनुमान जी का रावण को उपदेश

सर्ग 52
विभीषण द्वारा दूत-वध का निषेध

सर्ग 53
हनुमान जी की पूँछ में अग्नि और माता सीता की प्रार्थना

सर्ग 54
लंका-दहन और सागर में अग्नि-शमन

सर्ग 55
हनुमान जी की चिंता और सीता जी की कुशलता का ज्ञान

सर्ग 56
हनुमान जी का अरिष्ट पर्वत पर आरोहण और प्रत्यागमन की उड़ान

सर्ग 57
हनुमान जी का महेंद्र पर्वत पर प्रत्यागमन

सर्ग 58
हनुमानजी द्वारा वानरों को लंका-यात्रा का वृत्तांत सुनाना

सर्ग 59
हनुमान द्वारा सीताजी की विरह-दशा और पातिव्रत का वर्णन

सर्ग 60
अंगद का प्रस्ताव और जाम्बवान् का विवेकपूर्ण परामर्श

सर्ग 61
मधुवन में वानरों का उल्लास

सर्ग 62
मधुवन में दधिमुख की पराजय

सर्ग 63
सुग्रीव का कार्यसिद्धि का अनुमान और वानरों का आह्वान

सर्ग 64
दधिमुख द्वारा सुग्रीव को समाचार

सर्ग 65
हनुमान द्वारा श्री राम को सीता की दशा का वर्णन

सर्ग 66
चूड़ामणि देखकर श्रीराम का विलाप

सर्ग 67
हनुमान द्वारा सीता का संदेश-कथन

सर्ग 68
हनुमान द्वारा सीता जी के अंतिम संदेश का वर्णन
सामग्री
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