स्मृति · इतिहास · रामायण

अयोध्याकाण्ड

The second Kanda. Episodes are added as they are published.

काण्ड 20 Sargas

सर्ग

119 सर्ग — पढ़ें और सुनें

सर्ग 1

श्रीराम के दिव्य गुण और युवराज पद का विचार

सर्ग 2

राजा दशरथ द्वारा श्री राम के राज्याभिषेक का प्रस्ताव

सर्ग 3

श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी और राजा दशरथ का उपदेश

सर्ग 4

दशरथ का गुप्त परामर्श और कौसल्या का हर्ष

सर्ग 5

श्रीराम और सीता द्वारा उपवास का संकल्प

सर्ग 6

अयोध्या में अभिषेक की पूर्वसंध्या का उल्लास

सर्ग 7

मन्थरा का षड्यंत्र-प्रवेश

सर्ग 8

मन्थरा द्वारा कैकेयी को भड़काना

सर्ग 9

मन्थरा द्वारा दो वरों का स्मरण और कैकेयी का कोपभवन में प्रवेश

सर्ग 10

कैकेयी का कोपभवन में प्रवेश

सर्ग 11

कैकेयी द्वारा दो वरों की माँग

सर्ग 12

दशरथ का विलाप और कैकेयी की हठ

सर्ग 13

दशरथ का दारुण विलाप और रात्रि का संताप

सर्ग 14

सुमन्त्र को श्री राम को लाने का आदेश

सर्ग 15

सुमन्त्र का श्री राम को बुलाने जाना

सर्ग 16

सुमन्त्र का श्रीराम के प्रासाद में प्रवेश

सर्ग 17

श्रीराम का राजपथ पर भव्य प्रस्थान

सर्ग 18

श्रीराम और कैकेयी का संवाद

सर्ग 19

श्रीराम का शांत भाव से कैकेयी के भवन से प्रस्थान

सर्ग 20

माता कौसल्या का दारुण विलाप

सर्ग 21

कौशल्या और लक्ष्मण को श्रीराम का समझाना

सर्ग 22

श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को दैव का मर्म समझाना

सर्ग 23

लक्ष्मण का पौरुष-उद्घोष और रोष

सर्ग 24

कौशल्या का विलाप और श्रीराम द्वारा सांत्वना

सर्ग 25

माता कौशल्या द्वारा श्रीराम का मंगलाचरण एवं रक्षा-विधान

सर्ग 26

श्रीराम द्वारा सीता जी को वनगमन का वृत्तांत सुनाना

सर्ग 27

सीता का वनगमन-संकल्प

सर्ग 28

श्रीराम द्वारा सीता को वन के कष्टों का वर्णन

सर्ग 29

सीता का दृढ़ निश्चय और राम से वनगमन की प्रार्थना

सर्ग 30

सीता का दृढ़ संकल्प और श्रीराम की स्वीकृति

सर्ग 31

लक्ष्मण का वनगमन का दृढ़ संकल्प

सर्ग 32

श्रीराम द्वारा विपुल दान और त्रिजट प्रसंग

सर्ग 33

अयोध्या के मार्ग पर श्रीराम का पद-संचरण

सर्ग 34

महाराज दशरथ का विलाप और श्रीराम की विदाई

सर्ग 35

सुमन्त्र द्वारा कैकेयी को धिक्कार

सर्ग 36

राजा दशरथ की आज्ञा और सिद्धार्थ द्वारा असमंज का दृष्टांत

सर्ग 37

सीता का वल्कल-धारण और वसिष्ठ का क्रोध

सर्ग 38

श्रीराम द्वारा राजा दशरथ को सांत्वना और माता कौशल्या की रक्षा की प्रार्थना

सर्ग 39

श्रीराम द्वारा कौसल्या की देखरेख की प्रार्थना और सीताजी का उपदेश ग्रहण

सर्ग 40

अयोध्या से प्रस्थान और प्रजा का विलाप

सर्ग 41

अयोध्या का दारुण शोक

सर्ग 42

दशरथ का विलाप और कैकेयी का परित्याग

सर्ग 43

कौसल्या का विलाप

सर्ग 44

सुमित्रा द्वारा कौशल्या को सान्त्वना

सर्ग 45

तमसा नदी के तट पर प्रथम विश्राम

सर्ग 46

तमसा तट से चुपचाप प्रस्थान

सर्ग 47

तमसा तट पर पुरवासियों का विलाप और अयोध्या वापसी

सर्ग 48

अयोध्या की स्त्रियों का विलाप

सर्ग 49

कोसल की सीमा पर विदाई और दक्षिण दिशा की ओर यात्रा

सर्ग 50

गंगा तट पर आगमन और निषादराज गुह से भेंट

सर्ग 51

लक्ष्मण और गुह का रात्रि-संवाद

सर्ग 52

गंगा पार गमन और जटा धारण

सर्ग 53

वृक्ष के नीचे श्रीराम का विलाप और लक्ष्मण का सांत्वना

सर्ग 54

महर्षि भारद्वाज के आश्रम में आगमन

सर्ग 55

यमुना पारगमन और श्याम वट का पूजन

सर्ग 56

चित्रकूट पर आगमन और पर्णकुटी का निर्माण

सर्ग 57

सुमन्त्र का अयोध्या लौटना

सर्ग 58

सुमन्त्र द्वारा राजा दशरथ को श्रीराम का सन्देश सुनाना

सर्ग 59

सुमन्त्र द्वारा प्रकृति और अयोध्या के शोक का वर्णन

सर्ग 60

सुमन्त्र द्वारा कौसल्या को सांत्वना

सर्ग 61

कौशल्या का हृदयविदारक विलाप

सर्ग 62

दशरथ की याचना और कौशल्या का पश्चाताप

सर्ग 63

राजा दशरथ द्वारा अपने पूर्वकर्म का स्मरण

सर्ग 64

मुनि का शाप और महाराज दशरथ का देहावसान

सर्ग 65

महाराज दशरथ के देहावसान का प्रकटीकरण

सर्ग 66

प्रातःकाल और राजा दशरथ के देहांत का प्रकटीकरण

सर्ग 67

अराजक राज्य की दुर्दशा का वर्णन

सर्ग 68

भरत को लाने हेतु दूतों का प्रस्थान

सर्ग 69

दूतों की केकय देश की ओर तीव्र यात्रा

सर्ग 70

दूतों का भरत को संदेश देना और भरत का प्रस्थान

सर्ग 71

भरत का अयोध्या की ओर द्रुतगामी गमन

सर्ग 72

कैकेयी द्वारा भरत को सत्य का प्रकटीकरण

सर्ग 73

भरत द्वारा कैकेयी की भर्त्सना

सर्ग 74

भरत का कैकेयी पर क्रोध और राम को लौटाने का संकल्प

सर्ग 75

कौशल्या के सम्मुख भरत की सौगंध

सर्ग 76

महाराज दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार

सर्ग 77

अस्थि-संचयन और वसिष्ठ द्वारा सांत्वना

सर्ग 78

शत्रुघ्न द्वारा मंथरा को दण्ड

सर्ग 79

भरत द्वारा स्तुति-गान का निषेध और वसिष्ठ द्वारा सभा का आयोजन

सर्ग 80

वन-मार्ग का भव्य निर्माण

सर्ग 81

महर्षि वशिष्ठ द्वारा राजसभा का आयोजन

सर्ग 82

वशिष्ठ द्वारा राजसभा का आयोजन

सर्ग 83

भरत द्वारा राजसी वंदना का निषेध और वन-गमन की तैयारी

सर्ग 84

गुह और भरत का मिलन तथा भरत का सदिच्छा प्रकट करना

सर्ग 85

भरत और निषादराज गुह का स्नेहपूर्ण मिलन

सर्ग 86

गुह द्वारा लक्ष्मण के रात्रि-जागरण का वर्णन

सर्ग 87

गुह द्वारा लक्ष्मण के विलाप और रात्रि जागरण का वर्णन

सर्ग 88

श्रीराम की तृण-शय्या देखकर भरत का विलाप

सर्ग 89

गंगा पार कर भरद्वाज आश्रम की ओर प्रस्थान

सर्ग 90

महर्षि भरद्वाज द्वारा दिव्य आतिथ्य का संकल्प

सर्ग 91

महर्षि भरद्वाज का दिव्य आतिथ्य

सर्ग 92

भरद्वाज मुनि द्वारा चित्रकूट का मार्ग निर्देश

सर्ग 93

चित्रकूट की ओर प्रस्थान

सर्ग 94

श्रीराम द्वारा सीता जी को चित्रकूट का वर्णन

सर्ग 95

मन्दाकिनी का सौन्दर्य वर्णन

सर्ग 96

भरत की सेना को देखकर लक्ष्मण का क्रोध

सर्ग 97

श्रीराम द्वारा लक्ष्मण का क्रोध शांत करना

सर्ग 98

भरत का श्रीराम की पर्णकुटी की ओर प्रस्थान

सर्ग 99

भरत का राम के आश्रम में प्रवेश

सर्ग 100

श्रीराम द्वारा भरत को राजधर्म का उपदेश

सर्ग 101

भरत द्वारा पिता के देहावसान का समाचार

सर्ग 102

श्रीराम द्वारा राजा दशरथ का तर्पण

सर्ग 103

माताओं का आगमन और कौसल्या का विलाप

सर्ग 104

माताओं का आश्रम में आगमन और कौसल्या का विलाप

सर्ग 105

काल और जीवन की नश्वरता पर श्रीराम का उपदेश

सर्ग 106

भरत का श्रीराम से अयोध्या लौटने का अनुरोध

सर्ग 107

श्रीराम द्वारा भरत को पितृ-आज्ञा पालन का पावन उपदेश

सर्ग 108

जाबालि द्वारा सांसारिक युक्तियों से राम को प्रबोधन

सर्ग 109

श्रीराम द्वारा सत्य और धर्म की प्रतिष्ठा

सर्ग 110

महर्षि वशिष्ठ द्वारा इक्ष्वाकु वंश का वर्णन

सर्ग 111

महर्षि वसिष्ठ का उद्बोधन और भरत का आग्रह

सर्ग 112

श्रीराम द्वारा भरत को चरणपादुका प्रदान

सर्ग 113

भरत का प्रत्यागमन और महर्षि भरद्वाज से भेंट

सर्ग 114

भरत का सूने राजभवन में प्रवेश

सर्ग 115

नन्दिग्राम में पादुका-प्रतिष्ठा

सर्ग 116

चित्रकूट के ऋषियों का प्रस्थान-विचार

सर्ग 117

महर्षि अत्रि के आश्रम में आगमन और अनुसूया का पातिव्रत-उपदेश

सर्ग 118

सीता द्वारा अनसूया को अपने स्वयंवर की कथा सुनाना

सर्ग 119

अत्रि आश्रम से विदाई और दण्डकारण्य में प्रवेश

अध्याय

Sargas in Ayodhya Kanda