
स्मृति · इतिहास · महाभारत
वनपर्व
अध्याय › प्रसंगसंरचना श्रेणी — प्रकाशन के साथ सामग्री जुड़ती जाएगी
अध्याय
315 अध्याय — पढ़ें और सुनें

अध्याय 1
नागरिकों का पाण्डवों के पीछे वन गमन

अध्याय 2
शौनक मुनि द्वारा युधिष्ठिर को शोक-निवारक उपदेश

अध्याय 3
सूर्यदेव की उपासना और अक्षयपात्र की प्राप्ति

अध्याय 4
विदुर का धृतराष्ट्र को हितोपदेश और विदुर-निर्वासन

अध्याय 5
विदुर का पाण्डवों से मिलन और धृतराष्ट्र का पश्चाताप

अध्याय 6
विदुर की हस्तिनापुर वापसी और दुर्योधन का क्षोभ

अध्याय 7
व्यासजी की धृतराष्ट्र को चेतावनी

अध्याय 8
महर्षि मैत्रेय का आगमन और उपदेश

अध्याय 9
दुर्योधन की धृष्टता और मैत्रेय का शाप

अध्याय 10
काम्यक वन में किर्मीर राक्षस का सामना

अध्याय 11
भीमसेन द्वारा किर्मीर का संहार

अध्याय 12
श्रीकृष्ण का आगमन और अर्जुन द्वारा स्तुति

अध्याय 13
श्रीकृष्ण का आगमन और द्रौपदी का विलाप

अध्याय 14
श्रीकृष्ण द्वारा अनुपस्थिति का कारण और द्वारका पर शाल्व का आक्रमण

अध्याय 15
प्रद्युम्न का पराक्रम और द्युमान के साथ युद्ध

अध्याय 16
प्रद्युम्न द्वारा द्युमान का वध और श्रीकृष्ण का प्रयाण

अध्याय 17
समुद्र तट पर श्रीकृष्ण और शाल्व का मायावी युद्ध

अध्याय 18
सौभ विमान का विध्वंस और शाल्व का वध

अध्याय 19
शाल्व का द्वारका पर आक्रमण

अध्याय 20
द्वारका की वीरों द्वारा रक्षा

अध्याय 21
प्रद्युम्न और द्युमान् का युद्ध

अध्याय 22
प्रद्युम्न का पराक्रम और द्युमान् का वध

अध्याय 23
श्रीकृष्ण का शाल्व-वध का संकल्प

अध्याय 24
सौभ नगर पर श्रीकृष्ण का प्रहार

अध्याय 25
द्वैतवन में पाण्डवों का प्रवेश

अध्याय 26
महर्षि मार्कण्डेय का आगमन

अध्याय 27
द्रौपदी का विलाप और आक्रोश

अध्याय 28
क्षमा और तेज: प्रह्लाद-बलि संवाद

अध्याय 29
द्रौपदी का कर्म और दैव पर विचार

अध्याय 30
युधिष्ठिर का उत्तर: धर्म की महत्ता

अध्याय 31
द्रौपदी का संताप और दैव पर विचार

अध्याय 32
युधिष्ठिर द्वारा धर्म की महिमा का प्रतिपादन

अध्याय 33
द्रौपदी द्वारा पुरुषार्थ और कर्म की महत्ता का वर्णन

अध्याय 34
भीमसेन द्वारा क्षात्रधर्म और पराक्रम का उद्घोष

अध्याय 35
भीमसेन द्वारा त्रिवर्ग (धर्म, अर्थ, काम) का विवेचन

अध्याय 36
युधिष्ठिर की सत्यनिष्ठा और महर्षि व्यास का आगमन

अध्याय 37
व्यासजी द्वारा युधिष्ठिर को प्रतिस्मृति विद्या का उपदेश

अध्याय 38
अर्जुन का तपस्या हेतु इन्द्रकील पर्वत की ओर प्रस्थान

अध्याय 39
इन्द्र द्वारा वृद्ध ब्राह्मण के रूप में अर्जुन की परीक्षा

अध्याय 40
शूकर रूपी दानव मूक और किरात रूप में भगवान शिव का आगमन

अध्याय 41
किरात-अर्जुन युद्ध और पाशुपतास्त्र की प्राप्ति

अध्याय 42
लोकपालों का आगमन और दिव्य अस्त्रों की प्राप्ति

अध्याय 43
अमरावती में अर्जुन का स्वागत

अध्याय 44
दिव्यास्त्र और गन्धर्व-विद्या की शिक्षा

अध्याय 45
उर्वशी को इन्द्र का सन्देश

अध्याय 46

अध्याय 47
इन्द्र का आश्वासन और वरदान

अध्याय 48
अर्जुन के विरह में युधिष्ठिर का शोक

अध्याय 49
महर्षि बृहदश्व का आगमन और युधिष्ठिर का शोक

अध्याय 50

अध्याय 51

अध्याय 52
दमयन्ती का स्वयंवर और देवताओं का आगमन

अध्याय 53

अध्याय 54
अन्तःपुर में नल और दमयन्ती का संवाद

अध्याय 55
नल का अंतःपुर में प्रवेश और दमयन्ती को देव-सन्देश देना

अध्याय 56
दमयन्ती का स्वयंवर और वास्तविक नल की पहचान

अध्याय 57
कलि का देवताओं से मिलना और नल से प्रतिशोध का संकल्प

अध्याय 58
कलि का नल में प्रवेश और पुष्कर को द्यूत के लिए उकसाना

अध्याय 59
द्यूत-क्रीड़ा में नल की पराजय और बच्चों की विदाई

अध्याय 60
नल का सर्वस्व गँवाना और दमयन्ती के साथ वन-गमन

अध्याय 61
दमयन्ती का विलाप और व्याध का भस्म होना

अध्याय 62
दमयन्ती का वन में भटकना और पर्वत से संवाद

अध्याय 63
तपस्वियों के आश्रम में दमयन्ती और सुखद भविष्यवाणी

अध्याय 64
व्यापारियों का काफिला और मतवाले हाथियों का उत्पात

अध्याय 65
चेदिनगरी में प्रवेश और राजमाता का आश्रय

अध्याय 66
कर्कोटक नाग का उद्धार और नल का बाहुक बनना

अध्याय 67
चेदिराज के राजभवन में दमयन्ती का आश्रय

अध्याय 68
विदर्भराज भीम द्वारा नल और दमयन्ती की खोज

अध्याय 69
सुदेव द्वारा दमयन्ती की पहचान

अध्याय 70
दमयन्ती का कुल-परिचय और विदर्भ-प्रस्थान

अध्याय 71
दमयन्ती का विदर्भ आगमन और नल की खोज की नई योजना

अध्याय 72
पर्णाद का आगमन और बाहुक का रहस्योद्घाटन

अध्याय 73

अध्याय 74
दमयन्ती द्वारा नल की खोज का संकल्प

अध्याय 75
पर्णाद का अयोध्या से समाचार लेकर लौटना

अध्याय 76
दमयन्ती की दूसरी स्वयंवर की योजना

अध्याय 77
ऋतुपर्ण और बाहुक का विदर्भ प्रस्थान

अध्याय 78
विद्याओं का आदान-प्रदान और कलि की मुक्ति

अध्याय 79
नलोपाख्यान की समाप्ति और युधिष्ठिर को अक्षहृदय विद्या

अध्याय 80
देवर्षि नारद का आगमन और तीर्थ-महिमा का प्रसंग

अध्याय 81
पुलस्त्य-भीष्म संवाद: पुष्कर एवं पावन तीर्थों की महिमा

अध्याय 82
गंगा, प्रयाग और काशी आदि तीर्थों का महात्म्य

अध्याय 83
कुरुक्षेत्र और पावन उत्तर-तीर्थों की महिमा

अध्याय 84
गया तीर्थ, अक्षयवट और पूर्वी तीर्थों का महात्म्य

अध्याय 85
पुलस्त्य-कथा का उपसंहार एवं नारद का प्रस्थान

अध्याय 86
युधिष्ठिर का विलाप और धौम्य का दिशा-दर्शन

अध्याय 87
धौम्य द्वारा पूर्व दिशा के तीर्थों का वर्णन

अध्याय 88
धौम्य द्वारा दक्षिण दिशा के तीर्थों का वर्णन

अध्याय 89
धौम्य द्वारा पश्चिम दिशा के तीर्थों का वर्णन

अध्याय 90
धौम्य द्वारा उत्तर दिशा के तीर्थों का वर्णन

अध्याय 91
लोमश ऋषि का आगमन और इन्द्र का सन्देश

अध्याय 92
तीर्थयात्रा का परामर्श और अर्जुन का पराक्रम

अध्याय 93
पाण्डवों की तीर्थयात्रा का आरम्भ

अध्याय 94
अगस्त्य आश्रम का दर्शन और जिज्ञासा

अध्याय 95
अगस्त्योपाख्यान: लोपामुद्रा की सृष्टि और जन्म

अध्याय 96
अगस्त्य-लोपामुद्रा विवाह और धन की खोज

अध्याय 97
अगस्त्य का धन की खोज में गमन

अध्याय 98
वातापि का भक्षण और इल्वल का उद्धार

अध्याय 99
दृढ़स्यु का जन्म और कालकेय दानवों का उपद्रव

अध्याय 100

अध्याय 101
दधीचि का आत्मबलिदान और वृत्रासुर का वध

अध्याय 102
कालकेय दानवों का सागर में छिपना

अध्याय 103
अगस्त्य द्वारा समुद्र-पान

अध्याय 104
कालकेयों का विनाश और गंगा-अवतरण की भविष्यवाणी

अध्याय 105
राजा सगर का वंश और पुत्रों की उत्पत्ति

अध्याय 106
सगर का अश्वमेध और घोड़े की खोज

अध्याय 107
कपिल मुनि का क्रोध और सगर-पुत्रों का भस्म होना

अध्याय 108
अंशुमान द्वारा अश्व की पुनर्प्राप्ति और यज्ञ की पूर्णता

अध्याय 109
भागीरथ द्वारा पितरों का उद्धार और गंगा का पाताल-गमन

अध्याय 110
ऋषि ऋष्यशृंग का प्राकट्य और विभावण्डक का आश्रम

अध्याय 111
अंग देश में अनावृष्टि और ऋष्यशृंग को लाने की योजना

अध्याय 112
तपोवन में ऋष्यशृंग और गणिका का मिलन

अध्याय 113
ऋष्यशृंग का अपने पिता से आगंतुक का वर्णन करना

अध्याय 114
ऋष्यशृंग का अंग देश गमन, अनावृष्टि की समाप्ति और शांता से विवाह

अध्याय 115
जमदग्नि, रेणुका और परशुराम की पितृभक्ति

अध्याय 116

अध्याय 117
परशुराम का प्रतिशोध और समंतपंचक

अध्याय 118
प्रभास क्षेत्र की पावन यात्रा

अध्याय 119
प्रभास में श्रीकृष्ण और बलराम का आगमन

अध्याय 120
बलराम का रोष और धर्म की विडंबना

अध्याय 121
च्यवन द्वारा राजा शर्याति के यज्ञ का आरम्भ

अध्याय 122
इन्द्र का कोप और च्यवन द्वारा उनकी भुजा का स्तम्भन

अध्याय 123
मद नामक महादानव की उत्पत्ति और इन्द्र का आत्मसमर्पण

अध्याय 124
शर्याति के यज्ञ की पूर्णता और पवित्र तीर्थों का वर्णन

अध्याय 125
राजा सोमका और उनके एकमात्र पुत्र जन्तु की कथा

अध्याय 126
जन्तु का यज्ञ, सौ पुत्रों की प्राप्ति और राजा सोमका की सद्गति

अध्याय 127
राजा सोमक और पुत्र जन्तु का प्रसंग

अध्याय 128
जन्तु का यज्ञ और राजा सोमक का उद्धार

अध्याय 129
कुरुक्षेत्र और सरस्वती के पावन तीर्थ

अध्याय 130
राजा कुरु की तपस्या और श्येन-कपोत प्रसंग

अध्याय 131
राजा उशीनर का आत्म-बलिदान और तराजू की परीक्षा

अध्याय 132
कहोड मुनि का प्रसंग और अष्टावक्र का जन्म

अध्याय 133
राजा जनक द्वारा अष्टावक्र की परीक्षा

अध्याय 134
अष्टावक्र और वन्दी का संख्या-शास्त्रार्थ

अध्याय 135
वन्दी का रहस्योद्घाटन और कहोड़ का उद्धार

अध्याय 136
यवक्रीत की तपस्या और इन्द्र का उपदेश

अध्याय 137

अध्याय 138
भारद्वाज का शाप और रैभ्य का वध

अध्याय 139
पाण्डवों का गन्धमादन की ओर प्रस्थान

अध्याय 140
द्रौपदी की थकावट और घटोत्कच का आगमन

अध्याय 141
विशाल बदरी और नर-नारायण आश्रम में प्रवेश

अध्याय 142
दिव्य सौगन्धिक कमल का आगमन

अध्याय 143
भीमसेन का सौगन्धिक वन की ओर प्रस्थान

अध्याय 144
कदली-वन में भीम और हनुमान की भेंट

अध्याय 145

अध्याय 146

अध्याय 147

अध्याय 148

अध्याय 149
हनुमान जी का विराट रूप और वरदान

अध्याय 150
सौगंधिक सरोवर की प्राप्ति

अध्याय 151
सौगन्धिक सरोवर पर भीमसेन का आगमन

अध्याय 152
राक्षसों पर भीमसेन की विजय

अध्याय 153
भीमसेन की खोज में युधिष्ठिर का प्रस्थान

अध्याय 154
सरोवर तट पर भ्रातृ-मिलन और युधिष्ठिर की सीख

अध्याय 155
गन्धमादन पर्वत पर पाण्डवों का सुखद निवास

अध्याय 156
जटासुर का छल और पाण्डवों का अपहरण-प्रयास

अध्याय 157
राजर्षि वृषपर्वा के आश्रम में आगमन

अध्याय 158
हिमवान् और श्वेत पर्वत की दुर्गम यात्रा

अध्याय 159
महर्षि आर्ष्टिषेण का सत्कार और उपदेश

अध्याय 160
भीमसेन का कुबेर के सरोवर की ओर प्रस्थान

अध्याय 161
क्रोधवश राक्षसों से भीम का महासंग्राम

अध्याय 162
युधिष्ठिर का आगमन और भीम को उपदेश

अध्याय 163
अर्जुन का गन्धमादन पर्वत पर प्रत्यागमन

अध्याय 164
दिव्यास्त्रों के प्रदर्शन पर देवर्षि का निषेध

अध्याय 165
अर्जुन द्वारा स्वर्ग-यात्रा एवं अस्त्र-प्राप्ति का वर्णन

अध्याय 166
निवातकवचों के वध का दायित्व और प्रस्थान

अध्याय 167
निवातकवचों के साथ भीषण युद्ध और माया का निवारण

अध्याय 168
निवातकवचों का पूर्ण संहार और हिरण्यपुर का दर्शन

अध्याय 169
हिरण्यपुर का विनाश और दानवों की पराजय

अध्याय 170
अर्जुन का स्वर्ग से गन्धमादन पर्वत पर लौटना

अध्याय 171
अस्त्र-प्रदर्शन और देवर्षि नारद की चेतावनी

अध्याय 172
गन्धमादन पर सुखद प्रवास और ऋषि वृषपर्वा का आश्रम

अध्याय 173
ऋषि आष्टिषेण के आश्रम में निवास

अध्याय 174
भीमसेन का वन-भ्रमण और अजगर का भयानक शिकंजा

अध्याय 175
गन्धमादन से प्रस्थान और आश्रमों में निवास

अध्याय 176
द्वैतवन में पाण्डवों का पुनः आगमन

अध्याय 177
भीमसेन का अजगर द्वारा पकड़ा जाना

अध्याय 178
अजगर और भीम का संवाद तथा नहुष का परिचय

अध्याय 179
युधिष्ठिर की खोज और सर्प से भेंट

अध्याय 180
नहुष-युधिष्ठिर संवाद और शापमुक्ति

अध्याय 181
नहुष का शाप-मोचन और भीम का उद्धार

अध्याय 182
महर्षि मार्कण्डेय का आगमन

अध्याय 183
कर्म-विपाक और प्रारब्ध का उपदेश

अध्याय 184
चारों युगों का धर्म-विभाजन

अध्याय 185
मत्स्योपाख्यान: मनु और दिव्य मत्स्य

अध्याय 186
महाप्रलय और वटपत्रशायी बाल मुकुन्द के दर्शन

अध्याय 187
मत्स्योपाख्यान और प्रलय की कथा

अध्याय 188
महाप्रलय और वटपत्रशायी बालमुकुन्द का दर्शन

अध्याय 189
भगवान् का आत्म-परिचय और युगधर्म

अध्याय 190
कलियुग का अन्त और कल्कि अवतार

अध्याय 191
श्रीकृष्ण का साक्षात् नारायण-स्वरूप

अध्याय 192
मण्डूकोपाख्यान: राजा परीक्षित और सुशोभना

अध्याय 193
राजा शल का अहंकार और वामदेव का आगमन

अध्याय 194
शल का विनाश और दल का पश्चाताप

अध्याय 195
महर्षि उत्तंक की तपस्या और वरदान

अध्याय 196
उत्तंक का राजा बृहदश्व से निवेदन

अध्याय 197
कुवलाश्व का अभियान और धुन्धु का प्रकोप

अध्याय 198
धुन्धु का वध और धुन्धुमार नामकरण

अध्याय 199

अध्याय 200
पतिव्रता का उपदेश और धर्मव्याध का निर्देश

अध्याय 201
कौशिक का मिथिला गमन और व्याध से भेंट

अध्याय 202
धर्मव्याध द्वारा अपने कर्म और माता-पिता सेवा का वर्णन

अध्याय 203
अहिंसा और सदाचार का गूढ़ रहस्य

अध्याय 204
आत्मज्ञान, गुण-तत्व और कौशिक का उद्धार

अध्याय 205
मिथिला में धर्मव्याध से ब्राह्मण की भेंट

अध्याय 206
स्वधर्म और अहिंसा के रहस्य का उद्घाटन

अध्याय 207
कर्म-सिद्धांत और दैव का निरूपण

अध्याय 208
सदाचार, इंद्रिय-निग्रह और साधुता के लक्षण

अध्याय 209
इंद्रिय-विज्ञान, पंचमहाभूत और परमात्मा का तत्वज्ञान

अध्याय 210
माता-पिता की सेवा और कौशिक का आत्मबोध

अध्याय 211
इंद्रिय-निग्रह और कर्म-सिद्धांत का उपदेश

अध्याय 212
पंचमहाभूत और प्राण-अपान का विवेचन

अध्याय 213
त्रिगुण का स्वरूप और मोक्ष-मार्ग

अध्याय 214
माता-पिता की प्रत्यक्ष सेवा का दर्शन

अध्याय 215
धर्मव्याध के पूर्वजन्म की कथा

अध्याय 216
कौशिकोद्धार और व्याध-गीता का उपसंहार

अध्याय 217
अग्नि-वंश तथा बृहस्पति का प्राकट्य

अध्याय 218
विभिन्न पावन तथा लौकिक अग्नियों का विवरण

अध्याय 219
सप्तर्षि-पत्नियों के प्रति अग्नि का आकर्षण और वन-गमन

अध्याय 220
स्वाहा का छल-रूप और शरवण में वीर्य-निक्षेप

अध्याय 221
छह मुख वाले महासेन स्कन्द का प्राकट्य

अध्याय 222
ऋषिपत्नियों का त्याग और देवताओं का भय

अध्याय 223
स्वाहा का प्रेम और श्वेत पर्वत

अध्याय 224

अध्याय 225
ऋषि-पत्नियों का त्याग और इन्द्र का भय

अध्याय 226
देवताओं से युद्ध और विशाख की उत्पत्ति

अध्याय 227
देवसेनापति पद पर स्कन्द का अभिषेक

अध्याय 228
स्कन्द-ग्रह और मातृकाओं का स्वरूप

अध्याय 229
स्कन्द-ग्रह और मातृकाओं की उत्पत्ति

अध्याय 230
बाल-ग्रहों और मातृकाओं के लक्षण एवं प्रभाव

अध्याय 231
महिषासुर का वध और स्कन्द की विजय

अध्याय 232
स्कन्द-माहात्म्य और उपाख्यान का समापन

अध्याय 233
द्रौपदी और सत्यभामा का संवाद — सत्यभामा का प्रश्न

अध्याय 234
द्रौपदी द्वारा पतिव्रत एवं गृहस्थ-धर्म का उपदेश

अध्याय 235

अध्याय 236
धृतराष्ट्र से अनुमति की युक्ति

अध्याय 237

अध्याय 238
गंधर्वों के साथ संघर्ष का सूत्रपात

अध्याय 239
कर्ण और कौरव सेना का पराभव

अध्याय 240
दुर्योधन का बंदी बनना और युधिष्ठिर की उदारता

अध्याय 241
कौरव-गन्धर्व संघर्ष का आरम्भ

अध्याय 242
कर्ण की पराजय और कौरव सेना का विध्वंस

अध्याय 243
दुर्योधन का बन्धन और युधिष्ठिर का धर्मोपदेश

अध्याय 244
पाण्डवों और गन्धर्वों का महासंग्राम

अध्याय 245
चित्रसेन का परिचय और दुर्योधन की मुक्ति

अध्याय 246
दुर्योधन की लज्जा और हस्तिनापुर वापसी

अध्याय 247
दुर्योधन का विषाद और प्रायोपवेशन का निश्चय

अध्याय 248
कर्ण और शकुनि द्वारा दुर्योधन को सांत्वना

अध्याय 249

अध्याय 250
दुर्योधन का प्रायोपवेशन और पाताल में आह्वान

अध्याय 251
दानवों द्वारा दुर्योधन को आश्वासन

अध्याय 252
कर्ण की प्रतिज्ञा और दुर्योधन का नगर प्रवेश

अध्याय 253

अध्याय 254
दुर्योधन का नगर-प्रवेश और कर्ण की प्रतिज्ञा

अध्याय 255
युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन के यज्ञ का वृत्तांत सुनना

अध्याय 256
द्वैतवन के मृगों का स्वप्न-दर्शन

अध्याय 257
पाण्डवों का काम्यक वन गमन और जयद्रथ का प्रसंग

अध्याय 258
जयद्रथ द्वारा द्रौपदी को देखना और कोटिकास्य को भेजना

अध्याय 259
काम्यक वन में जयद्रथ की दृष्टि द्रौपदी पर पड़ना

अध्याय 260
कोटिक का आश्रम में प्रवेश और द्रौपदी से संवाद

अध्याय 261
कोटिक द्वारा जयद्रथ को द्रौपदी का परिचय देना

अध्याय 262
जयद्रथ का कुटिया में प्रवेश और द्रौपदी को प्रलोभन

अध्याय 263
द्रौपदी द्वारा जयद्रथ को तीखी फटकार और चेतावनी

अध्याय 264
जयद्रथ द्वारा द्रौपदी का बलपूर्वक हरण

अध्याय 265
पाण्डवों का आश्रम लौटना और द्रौपदी-हरण की सूचना

अध्याय 266
पाण्डवों और सिन्धु-सेना का घमासान युद्ध

अध्याय 267
सौवीर सेना का संहार और जयद्रथ का पलायन

अध्याय 268
द्रौपदी का आश्रम गमन और जयद्रथ का पीछा

अध्याय 269
जयद्रथ का बन्धन और मुण्डन

अध्याय 270
जयद्रथ की मुक्ति और युधिष्ठिर का शोक

अध्याय 271
जयद्रथ को महादेव जी से वरदान

अध्याय 272
मार्कण्डेय जी द्वारा रामोपाख्यान का आरम्भ

अध्याय 273
रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण की उत्पत्ति

अध्याय 274
रावण आदि की तपस्या और वरदान-प्राप्ति

अध्याय 275
देवताओं की प्रार्थना और विष्णु-अवतार का निश्चय

अध्याय 276
श्रीराम का बाल्यकाल, विवाह और वनवास

अध्याय 277
शूर्पणखा का विरूपण और खर-दूषण का वध

अध्याय 278

अध्याय 279
लंका में सीता और अशोक वाटिका

अध्याय 280
सीता की खोज और कबन्ध का उद्धार

अध्याय 281
सुग्रीव से मित्रता और सात ताल-वृक्षों का वेधन

अध्याय 282
बालि-वध और सुग्रीव का राज्याभिषेक

अध्याय 283
हनुमान द्वारा सीता-खोज, लंका-दहन और शुभ समाचार

अध्याय 284
सेना का प्रस्थान, विभीषण-शरणागति और सेतु-निर्माण

अध्याय 285
लंका की घेराबंदी और भीषण महासंग्राम का आरम्भ

अध्याय 286
कुम्भकर्ण का जागरण और श्रीराम द्वारा उसका वध

अध्याय 287
इन्द्रजीत का मायावी युद्ध और लक्ष्मण द्वारा उसका संहार

अध्याय 288
श्रीराम-रावण का महायुद्ध और लंकापति का अंत

अध्याय 289
श्रीराम का अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक

अध्याय 290
मार्कण्डेय जी द्वारा युधिष्ठिर को सान्त्वना

अध्याय 291
रामोपाख्यान का माहात्म्य और श्रीराम का राज्य-वैभव

अध्याय 292
युधिष्ठिर का प्रश्न और राजा अश्वपति की तपस्या

अध्याय 293
सावित्री का प्राकट्य और वर की खोज

अध्याय 294
सावित्री का सत्यवान को वरण करना और नारद जी का आगमन

अध्याय 295
सावित्री और सत्यवान का विवाह

अध्याय 296
सावित्री का त्रिरात्र व्रत

अध्याय 297
सत्यवान का अवसान और यमराज का आगमन

अध्याय 298
सावित्री-यमराज संवाद और वरदान

अध्याय 299
सत्यवान का पुनर्जीवन और आश्रम वापसी

अध्याय 300
द्युमत्सेन का राज्याभिषेक और सावित्री का माहात्म्य

अध्याय 301
सूर्यदेव द्वारा कर्ण को स्वप्न में सचेत करना

अध्याय 302
कर्ण और सूर्यदेव का संवाद

अध्याय 303
सूर्यदेव द्वारा कर्ण को अमोघ शक्ति मांगने का परामर्श

अध्याय 304
महर्षि दुर्वासा का आगमन और कुन्ती की सेवा

अध्याय 305
दुर्वासा द्वारा कुन्ती को वरदान और कुतूहल

अध्याय 306
भगवान सूर्य का प्राकट्य और कुन्ती का भय

अध्याय 307
कर्ण द्वारा कवच और कुण्डल का दान

अध्याय 308
इन्द्र द्वारा अमोघ शक्ति प्रदान करना और प्रस्थान

अध्याय 309
युधिष्ठिर का भय-निवारण और कथा का उपसंहार

अध्याय 310
मृग द्वारा अरणि का हरण और ब्राह्मण की पुकार

अध्याय 311
मृग का पीछा और पाण्डवों की थकावट व विलाप

अध्याय 312
सरोवर पर नकुल और सहदेव का अचेत होना

अध्याय 313
यक्ष-युधिष्ठिर का गूढ़ संवाद

अध्याय 314
नकुल का चयन और धर्मराज का प्राकट्य

अध्याय 315
धर्मदेव के वरदान और वनपर्व का समापन
सामग्री
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