स्मृति · इतिहास · महाभारत

उद्योगपर्व

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अध्याय

197 अध्याय — पढ़ें और सुनें

अध्याय 1

उपप्लव्य में सभा

अध्याय 2

दूत भेजने का निर्णय

अध्याय 3

दुर्योधन की कुटिल नीति

अध्याय 4

कर्ण का दुस्साहसी परामर्श

अध्याय 5

श्रीकृष्ण का हस्तिनापुर प्रस्थान

अध्याय 6

हस्तिनापुर में भव्य स्वागत

अध्याय 7

अंतिम शांति प्रस्ताव

अध्याय 8

दुर्योधन का बंदी बनाने का विफल प्रयास

अध्याय 9

श्रीकृष्ण का विश्वरूप दर्शन

अध्याय 10

कुंती का संदेश और विलाप

अध्याय 11

श्रीकृष्ण का पांडवों को संदेश

अध्याय 12

सेनाओं का एकत्र होना

अध्याय 13

दुर्योधन का श्रीकृष्ण से सहायता मांगना

अध्याय 14

शल्य की विवशता और वचनबद्धता

अध्याय 15

श्रीकृष्ण का हस्तिनापुर आगमन

अध्याय 16

कर्ण का परामर्श और हठ

अध्याय 17

विदुर का नीतिपूर्ण उपदेश

अध्याय 18

दुर्योधन का अड़ियल व्यवहार

अध्याय 19

विश्वरूप का दर्शन

अध्याय 20

श्रीकृष्ण की प्रस्थान यात्रा

अध्याय 21

उपप्लव्य में श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 22

पांडवों की युद्ध तैयारी

अध्याय 23

दुर्योधन की प्रति-तैयारियाँ

अध्याय 24

विभक्त होता हुआ संसार

अध्याय 25

दुर्योधन का अहंकार

अध्याय 26

हस्तिनापुर में श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 27

दुर्योधन का गुप्त षड्यंत्र

अध्याय 28

कर्ण का परामर्श

अध्याय 29

विदुर का हितोपदेश

अध्याय 30

धृतराष्ट्र की सभा में श्रीकृष्ण

अध्याय 31

दुर्योधन का अहंकार और अस्वीकृति

अध्याय 32

श्रीकृष्ण का विश्वरूप दर्शन

अध्याय 33

श्रीकृष्ण की विदाई

अध्याय 34

उपप्लव्य में श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 35

सैन्य गठबंधन का आयोजन

अध्याय 36

कर्ण का आंतरिक द्वंद्व

अध्याय 37

श्रीकृष्ण का अंतिम शांति प्रस्ताव

अध्याय 38

हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान

अध्याय 39

धृतराष्ट्र की सभा में प्रवेश

अध्याय 40

कर्ण का परामर्श और दुर्योधन की हठ

अध्याय 41

श्रीकृष्ण की कठोर चेतावनी

अध्याय 42

श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का षड्यंत्र

अध्याय 43

श्रीकृष्ण का विराट रूप दर्शन

अध्याय 44

श्रीकृष्ण का विदाई और संदेश

अध्याय 45

उपप्लव्य में श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 46

पांडवों की युद्ध तैयारी

अध्याय 47

कौरवों का सैन्य संचयन

अध्याय 48

कर्ण का परामर्श और प्रतिज्ञा

अध्याय 49

दुर्योधन का सैन्य संभार और राजाओं का आगमन

अध्याय 50

श्रीकृष्ण की शांति दूत बनने की तैयारी

अध्याय 51

श्रीकृष्ण की हस्तिनापुर की ओर प्रस्थान

अध्याय 52

हस्तिनापुर में श्रीकृष्ण का आगमन और स्वागत

अध्याय 53

विदुर के घर श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 54

धृतराष्ट्र के साथ श्रीकृष्ण का संवाद

अध्याय 55

कौरव सभा में शांति प्रस्ताव

अध्याय 56

दुर्योधन का षड्यंत्र और विराट रूप

अध्याय 57

सात्यकि का परामर्श

अध्याय 58

श्रीकृष्ण का प्रस्थान और चेतावनी

अध्याय 59

कर्ण का आंतरिक संघर्ष

अध्याय 60

कुरुक्षेत्र युद्ध की तैयारी

अध्याय 61

दुर्योधन की सैन्य-संधि

अध्याय 62

द्रुपद का सहयोग

अध्याय 63

कर्ण की प्रतिज्ञा और संशय

अध्याय 64

कुरुक्षेत्र की ओर प्रस्थान

अध्याय 65

श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव

अध्याय 66

दुर्योधन की कुटिल तैयारियां

अध्याय 67

विदुर का परामर्श और श्रीकृष्ण की दृष्टि

अध्याय 68

कर्ण की सलाह और दुर्योधन की हठ

अध्याय 69

धृतराष्ट्र की चिंता

अध्याय 70

संजय का उपदेश

अध्याय 71

सैन्य तैयारियां

अध्याय 72

श्रीकृष्ण का अंतिम संकल्प

अध्याय 73

श्रीकृष्ण का हस्तिनापुर प्रस्थान

अध्याय 74

कुरु सभा में स्वागत

अध्याय 75

श्रीकृष्ण का शांति प्रस्ताव

अध्याय 76

कूटनीति की विफलता

अध्याय 77

दुर्योधन का अहंकार

अध्याय 78

श्रीकृष्ण का विश्वरूप

अध्याय 79

कर्ण को उपदेश

अध्याय 80

श्रीकृष्ण का प्रस्थान

अध्याय 81

उपप्लव्य में श्रीकृष्ण का आगमन

अध्याय 82

पांडवों की युद्ध तैयारियां

अध्याय 83

दूतों का प्रेषण और गठबंधन

अध्याय 84

कर्ण का दुर्योधन को परामर्श

अध्याय 85

सैन्य-संभार

अध्याय 86

श्रीकृष्ण की अंतिम रणनीति

अध्याय 87

कर्ण का अंतरद्वंद्व

अध्याय 88

राजाओं का समागम

अध्याय 89

श्रीकृष्ण का प्रस्थान

अध्याय 90

हस्तिनापुर में स्वागत

अध्याय 91

शांति का प्रस्ताव

अध्याय 92

दुर्योधन का षड्यंत्र

अध्याय 93

श्रीकृष्ण का आतिथ्य निषेध

अध्याय 94

विदुर का परामर्श

अध्याय 95

कुंती और श्रीकृष्ण का संवाद

अध्याय 96

हस्तिनापुर की राजसभा

अध्याय 97

श्रीकृष्ण का परम उपदेश

अध्याय 98

दुर्योधन की हठधर्मिता

अध्याय 99

कर्ण का दुर्योधन को परामर्श

अध्याय 100

महायुद्ध की व्यापक तैयारी

अध्याय 101

धृतराष्ट्र की चिंता

अध्याय 102

संजय का पांडवों के पास जाना

अध्याय 103

युद्ध के अशुभ संकेत

अध्याय 104

सेनाओं का प्रस्थान और व्यूह रचना

अध्याय 105

भीष्म और द्रोणाचार्य का उपदेश

अध्याय 106

कर्ण का प्रखर संकल्प

अध्याय 107

कूटनीति की विफलता

अध्याय 108

अंतिम सैन्य तैयारी

अध्याय 109

श्रीकृष्ण का कुरुक्षेत्र प्रस्थान

अध्याय 110

कर्ण का आंतरिक द्वंद्व

अध्याय 111

सैन्य व्यूह रचनाएं और गमन

अध्याय 112

कुरुक्षेत्र में अंतिम पड़ाव

अध्याय 113

दुर्योधन का मिथ्या अहंकार

अध्याय 114

सैन्य व्यूह रचना

अध्याय 115

कर्ण का दृढ़ संकल्प

अध्याय 116

शांति वार्ता की अंतिम असफलता

अध्याय 117

भीष्म द्वारा योद्धाओं का आकलन

अध्याय 118

सेनाओं का विभाजन और व्यवस्था

अध्याय 119

संजय की ज्ञानपूर्ण चेष्टा

अध्याय 120

संघर्ष की अंतिम तैयारी

अध्याय 121

दुर्योधन का अहंकार और योजना

अध्याय 122

रणनीतिक विचार-विमर्श

अध्याय 123

कर्ण का द्वंद्व और निष्ठा

अध्याय 124

कुरुक्षेत्र की बढ़ती छाया

अध्याय 125

धृतराष्ट्र का अंतर्द्वंद

अध्याय 126

सेनाओं का प्रस्थान और तैयारी

अध्याय 127

श्रीकृष्ण का रणनीतिक संकल्प

अध्याय 128

कर्ण का दुर्योधन के प्रति समर्पण

अध्याय 129

भीष्म द्वारा योद्धाओं का मूल्यांकन

अध्याय 130

दुर्योधन का अहंकार

अध्याय 131

श्रीकृष्ण का अंतिम शांति प्रयास

अध्याय 132

युद्ध का निकट आना

अध्याय 133

श्रीकृष्ण का प्रस्थान

अध्याय 134

युधिष्ठिर को श्रीकृष्ण का संदेश

अध्याय 135

महायुद्ध की व्यापक तैयारियाँ

अध्याय 136

विनाश का मंडराता साया

अध्याय 137

पांडवों को श्रीकृष्ण का परामर्श

अध्याय 138

सेनापतियों का चयन

अध्याय 139

कर्ण का परामर्श और अहंकार

अध्याय 140

कुरुक्षेत्र की ओर प्रस्थान

अध्याय 141

दुर्योधन का गर्व और अंतिम निश्चय

अध्याय 142

श्रीकृष्ण की अंतिम रणनीति

अध्याय 143

विचलित मन और संशय

अध्याय 144

महायुद्ध का उदय

अध्याय 145

सैन्य व्यूह रचना

अध्याय 146

अर्जुन का मोह और विषाद

अध्याय 147

श्रीकृष्ण का दैवीय उपदेश

अध्याय 148

युद्ध के शंखनाद का आरंभ

अध्याय 149

प्रारंभिक युद्ध का बिगुल

अध्याय 150

भीष्म की व्यूह रचना

अध्याय 151

दुर्योधन का मिथ्या अहंकार

अध्याय 152

नियति का मूक साक्षी

अध्याय 153

भीष्म द्वारा योद्धाओं का मूल्यांकन

अध्याय 154

सेनाओं का व्यूह विन्यास

अध्याय 155

अशुभ संकेत और नियति

अध्याय 156

अंतिम संकल्प

अध्याय 157

सेनापतियों का चयन

अध्याय 158

सेनाओं का व्यूह विन्यास

अध्याय 159

पांडवों का अडिग निश्चय

अध्याय 160

अंतिम पूर्व-तैयारी

अध्याय 161

पांडव सेना का आगमन

अध्याय 162

कौरवों की प्रतिक्रिया

अध्याय 163

अंतिम वार्ता का विफल प्रयास

अध्याय 164

महायुद्ध की पूर्व संध्या

अध्याय 165

सैन्य व्यूह रचना

अध्याय 166

कर्ण की धर्म-संकट और प्रतिज्ञा

अध्याय 167

श्रीकृष्ण का अंतिम उपदेश

अध्याय 168

महायुद्ध का प्रथम शंखनाद

अध्याय 169

अपशकुनों का आगमन

अध्याय 170

संजय की अंतिम व्यथा

अध्याय 171

सैन्य स्थिति का प्रत्यक्ष विवरण

अध्याय 172

योद्धाओं का अंतिम संकल्प

अध्याय 173

दुर्योधन का अहंकार और सेनाओं का जमघट

अध्याय 174

भीष्म का सैन्य संचालन और व्यूह रचना

अध्याय 175

पांडवों की व्यूह रचना और दिव्य सुरक्षा

अध्याय 176

तूफान से पहले की अंतिम शांति

अध्याय 177

महावीरों का आगमन

अध्याय 178

सेनाओं की व्यूह रचना

अध्याय 179

अंतिम संवाद का आदान-प्रदान

अध्याय 180

महायुद्ध का शंखनाद

अध्याय 181

सात अक्षौहिणी सेना का प्रयाण

अध्याय 182

पांडवों की व्यूह रचना और मंत्रणा

अध्याय 183

वृद्धों की व्यथा और संशय

अध्याय 184

महायुद्ध की अंतिम तैयारी

अध्याय 185

कुरुक्षेत्र में आगमन

अध्याय 186

योद्धाओं का अंतिम संकल्प

अध्याय 187

सेनाओं का व्यूह विन्यास

अध्याय 188

महायुद्ध का उद्घोष

अध्याय 189

सेनाओं का व्यूह-विन्यास

अध्याय 190

अर्जुन का विषाद और मोह

अध्याय 191

श्रीकृष्ण का उपदेश

अध्याय 192

महायुद्ध का आरम्भ

अध्याय 193

प्रथम सैन्य संघर्ष

अध्याय 194

सेनाओं का गिरता मनोबल

अध्याय 195

रणनीतिक गतिरोध

अध्याय 196

कर्ण का कठोर संकल्प

अध्याय 197

कुरुक्षेत्र का अंतिम निर्णय

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