स्मृति · इतिहास · महाभारत

आदिपर्व

अध्याय › प्रसंगसंरचना श्रेणी — प्रकाशन के साथ सामग्री जुड़ती जाएगी

अध्याय

236 अध्याय — पढ़ें और सुनें

अध्याय 1

सूतजी का आगमन और धृतराष्ट्र का विलाप

अध्याय 2

पर्व-संग्रह और अक्षौहिणी सेना का स्वरूप

अध्याय 3

पौष्य पर्व — गुरुभक्ति और उत्तंक की कथा

अध्याय 4

पौलोम पर्व — भृगु वंश का माहात्म्य

अध्याय 5

राक्षस पुलोमा और च्यवन का प्राकट्य

अध्याय 6

अग्निदेव को भृगु का शाप और ब्रह्माजी का वरदान

अध्याय 7

भृगुवंश का प्रसंग और च्यवन की उत्पत्ति

अध्याय 8

अग्निदेव की साक्षी, पुलोम का संहार और भृगु का शाप

अध्याय 9

अग्निदेव का क्षोभ और ब्रह्मा जी का समाधान

अध्याय 10

च्यवन का वंश और रुरु-प्रमद्वरा का प्रणय

अध्याय 11

सर्पदंश का आघात और रुरु का जीवन-दान

अध्याय 12

प्रमद्वरा का पुनर्जीवन और रुरु की सर्प-प्रतिहिंसा

अध्याय 13

शौनक जी का आस्तीक चरित विषयक प्रश्न

अध्याय 14

जरत्कारु द्वारा अपने अधोमुख लटके पितरों का दर्शन

अध्याय 15

जरत्कारु का विवाह हेतु प्रतिज्ञा और शर्तें

अध्याय 16

कद्रू और विनता को कश्यप जी से वरदान

अध्याय 17

अरुण का प्राकट्य और माता विनता को शाप

अध्याय 18

समुद्र मन्थन का निश्चय और मन्दराचल का स्थापन

अध्याय 19

कद्रू और विनता की होड़

अध्याय 20

कद्रू द्वारा सर्पों को शाप

अध्याय 21

महान समुद्र का पारगमन

अध्याय 22

विनता का दासी बनना

अध्याय 23

गरुड़ का प्राकट्य और महातेज

अध्याय 24

गरुड़ की उड़ान और सर्पों का संताप

अध्याय 25

स्वर्ग में अपशकुन और बृहस्पति की चेतावनी

अध्याय 26

देवताओं की युद्ध की तैयारी

अध्याय 27

गरुड़ और देवताओं का महासंग्राम

अध्याय 28

प्रज्वलित अग्नि का शमन और सूक्ष्म रूप धारण

अध्याय 29

रक्षक सर्पों का वध और अमृत का हरण

अध्याय 30

भगवान विष्णु का वरदान और इन्द्र से संधि

अध्याय 31

मुक्ति का मूल्य और अमृत की मांग

अध्याय 32

निषादों का भक्षण और ब्राह्मण की रक्षा

अध्याय 33

विभावसु और सुप्रतीक का वृत्तांत

अध्याय 34

बालखिल्य ऋषियों की रक्षा और गरुड़ का पराक्रम

अध्याय 35

बालखिल्यों का गमन और भोजन की तृप्ति

अध्याय 36

स्वर्ग में अपशकुन और बृहस्पति की चेतावनी

अध्याय 37

राजा परीक्षित और मुनि शमीक

अध्याय 38

शृंगी को पिता के अपमान का ज्ञान

अध्याय 39

शृंगी का राजा परीक्षित को शाप

अध्याय 40

शमीक द्वारा शृंगी की भर्त्सना और क्षमा का उपदेश

अध्याय 41

गौरमुख द्वारा राजा को सूचना और प्रासाद-निर्माण

अध्याय 42

कश्यप का आगमन और तक्षक से भेंट

अध्याय 43

तक्षक और कश्यप का मिलन

अध्याय 44

कश्यप का प्रभाव और प्रस्थान

अध्याय 45

राजा परीक्षित का देहावसान

अध्याय 46

जनमेजय का राज्याभिषेक

अध्याय 47

जनमेजय का मंत्रियों से प्रश्न

अध्याय 48

सर्पसत्र का संकल्प

अध्याय 49

मंत्रियों द्वारा राजा परीक्षित का वृत्तांत

अध्याय 50

महाराज परीक्षित का स्वर्गारोहण

अध्याय 51

जनमेजय का प्रतिशोध का संकल्प

अध्याय 52

सर्प-सत्र की तैयारी और अपशकुन

अध्याय 53

सर्प-सत्र का आरंभ और सर्पों का संहार

अध्याय 54

आस्तीक का यज्ञशाला में आगमन

अध्याय 55

जनमेजय का प्रश्न और कथा का संकल्प

अध्याय 56

महाभारत की महिमा और कौरव-पाण्डव रूपी वृक्ष

अध्याय 57

उपरिचर वसु का आख्यान और व्यास का जन्म

अध्याय 58

भू-भार और देवताओं का अंशावतार

अध्याय 59

सृष्टि का विस्तार और ब्रह्मा के मानस पुत्र

अध्याय 60

धर्म, कश्यप की संतति और दिव्य गणों का विस्तार

अध्याय 61

असुरों और दैत्यों का भूलोक पर अंशावतार

अध्याय 62

देवताओं और दिव्य पुरुषों का अंशावतार

अध्याय 63

राजा उपरिचर वसु की कथा और सत्यवती का प्राकट्य

अध्याय 64

राजा दुष्यन्त की वन-यात्रा और विशाल मृगया

अध्याय 65

राजा दुष्यन्त का महर्षि कण्व के आश्रम में प्रवेश

अध्याय 66

राजा दुष्यन्त और शकुन्तला की प्रथम भेंट

अध्याय 67

अंशावतरण — देवताओं और असुरों का प्राकट्य

अध्याय 68

राजा दुष्यन्त की वन-यात्रा और आखेट

अध्याय 69

महर्षि कण्व के तपोवन का दर्शन

अध्याय 70

शकुन्तला से राजा दुष्यन्त की भेंट

अध्याय 71

विश्वामित्र की तपस्या और मेनका का आगमन

अध्याय 72

शकुन्तला का जन्म और कण्व द्वारा पालन

अध्याय 73

शकुन्तला और दुष्यन्त का गान्धर्व विवाह तथा कण्व का आशीर्वाद

अध्याय 74

राजसभा में शकुन्तला का तिरस्कार और आकाशवाणी

अध्याय 75

पुरूरवा, नहुष और ययाति की पावन वंशावली

अध्याय 76

संजीवनी विद्या की प्राप्ति हेतु कच का आगमन

अध्याय 77

असुरों द्वारा कच का संहार और मदिरा में विलीन भस्म

अध्याय 78

मदिरा-पान का निषेध और कच-देवयानी का परस्पर शाप

अध्याय 79

शर्मिष्ठा की गुप्त याचना और ययाति का धर्म-संकट

अध्याय 80

शर्मिष्ठा के पुत्रों का जन्म और रहस्य का प्रकटीकरण

अध्याय 81

देवयानी का क्रोध और शुक्राचार्य का ययाति को शाप

अध्याय 82

ययाति की प्रार्थना और शुक्राचार्य का अनुग्रह

अध्याय 83

ज्येष्ठ पुत्रों का इनकार और ययाति का शाप

अध्याय 84

पूरू का त्याग, ययाति का भोग और महान वैराग्य

अध्याय 85

ययाति और इन्द्र का संवाद

अध्याय 86

ययाति का इन्द्र को उपदेश

अध्याय 87

ययाति और अष्टक का मिलन

अध्याय 88

कर्म, पुनर्जन्म और लोकों का रहस्य

अध्याय 89

चार राजाओं द्वारा पुण्य-दान

अध्याय 90

ययाति का पुनः स्वर्गारोहण

अध्याय 91

राजा प्रतीप और देवी गंगा

अध्याय 92

शंतनु का जन्म और महाभिष का शाप

अध्याय 93

शंतनु-गंगा मिलन और वसुओं का शाप

अध्याय 94

वसुओं की मुक्ति और गंगा का तिरोभाव

अध्याय 95

पुरु वंश का विस्तृत वर्णन

अध्याय 96

देवव्रत की शिक्षा और हस्तिनापुर आगमन

अध्याय 97

भीष्म द्वारा काशी की राजकुमारियों का हरण

अध्याय 98

शाल्व का पराभव और अम्बा का निवेदन

अध्याय 99

विचित्रवीर्य का निधन और कुरुवंश पर संकट

अध्याय 100

भीष्म द्वारा आपद्धर्म और नियोग का वर्णन

अध्याय 101

सत्यवती द्वारा महर्षि व्यास का स्मरण

अध्याय 102

धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुर का प्राकट्य

अध्याय 103

भीष्म की अडिग प्रतिज्ञा

अध्याय 104

दीर्घतमा और राजा बलि की कथा

अध्याय 105

सत्यवती द्वारा व्यास के जन्म का रहस्योद्घाटन

अध्याय 106

महर्षि व्यास का आगमन

अध्याय 107

धृतराष्ट्र और पाण्डु का गर्भाधान

अध्याय 108

विदुर का जन्म और धर्मराज को माण्डव्य का शाप

अध्याय 109

राजकुमारों का लालन-पालन और शिक्षा

अध्याय 110

धृतराष्ट्र और गान्धारी का विवाह

अध्याय 111

पृथा की कथा और दुर्वासा का वरदान

अध्याय 112

कर्ण का जन्म और त्याग

अध्याय 113

पाण्डु का कुन्ती और माद्री से विवाह

अध्याय 114

पाण्डु की दिग्विजय और वन-गमन

अध्याय 115

गांधारी का गर्भपात और सौ कुण्डों की स्थापना

अध्याय 116

दुर्योधन का जन्म और अमंगलकारी अपशकुन

अध्याय 117

धृतराष्ट्र के अन्य पुत्रों, दुःशला और युयुत्सु का प्राकट्य

अध्याय 118

ऋषि किन्दम का वध और पाण्डु को शाप

अध्याय 119

पाण्डु का वैराग्य और संन्यास का संकल्प

अध्याय 120

सन्तान प्राप्ति के लिए पाण्डु का नियोग-प्रस्ताव

अध्याय 121

श्वेतकेतु का आख्यान और पाण्डु का कुन्ती को नियोग का निर्देश

अध्याय 122

राजा कल्माषपाद का दृष्टान्त और धर्मज्ञ की खोज

अध्याय 123

दुर्वासा के मन्त्र का रहस्य और युधिष्ठिर का जन्म

अध्याय 124

भीमसेन और अर्जुन का जन्म

अध्याय 125

माद्री की सन्तान-कामना तथा नकुल और सहदेव का जन्म

अध्याय 126

वसन्त ऋतु में पाण्डु का काम-मोहित होना और देहत्याग

अध्याय 127

ग्राह-मोक्ष और ब्रह्मशिर अस्त्र की प्राप्ति

अध्याय 128

अस्त्र-परीक्षा के लिए रंगभूमि का निर्माण

अध्याय 129

अस्त्र-प्रदर्शन और भीम-दुर्योधन का गदा-युद्ध

अध्याय 130

रंगभूमि में अर्जुन का दिव्य प्रदर्शन

अध्याय 131

कर्ण का प्रवेश और अर्जुन को चुनौती

अध्याय 132

कर्ण का अंगराज्याभिषेक और रंगभूमि का समापन

अध्याय 133

अर्जुन की निष्ठा और ग्राह-परीक्षण

अध्याय 134

कृत्रिम पक्षी का वेध (लक्ष्य-वेध परीक्षा)

अध्याय 135

रंगभूमि का निर्माण

अध्याय 136

अस्त्र-प्रदर्शन का प्रारम्भ और भीम-दुर्योधन का गदा-युद्ध

अध्याय 137

अर्जुन का अद्भुत अस्त्र-कौशल

अध्याय 138

कर्ण का आगमन और अंगराज पद पर अभिषेक

अध्याय 139

द्रुपद-पराभव और गुरुदक्षिणा

अध्याय 140

युधिष्ठिर का यौवराज्याभिषेक

अध्याय 141

कणिक की कूटनीति

अध्याय 142

दुर्योधन का षड्यंत्र

अध्याय 143

वारणावत प्रस्थान की योजना

अध्याय 144

विदुर की गूढ़ चेतावनी

अध्याय 145

वारणावत में पांडवों का आगमन

अध्याय 146

लाक्षागृह के रहस्य का प्रकटीकरण

अध्याय 147

खनक का आगमन और सुरंग निर्माण

अध्याय 148

लाक्षागृह में एक वर्ष का सतर्क निवास

अध्याय 149

लाक्षागृह-दहन और पांडवों का निकास

अध्याय 150

हस्तिनापुर में शोक और वन की यात्रा

अध्याय 151

हिडिम्ब-राक्षस की लोलुपता

अध्याय 152

हिडिम्बा का भीम पर मुग्ध होना

अध्याय 153

हिडिम्ब का क्रोध और भीम की ललकार

अध्याय 154

हिडिम्ब-वध

अध्याय 155

हिडिम्बा का निवेदन और विवाह-स्वीकृति

अध्याय 156

घटोत्कच का जन्म और प्रस्थान

अध्याय 157

ब्राह्मण का विलाप

अध्याय 158

ब्राह्मणी का त्याग और तर्क

अध्याय 159

कन्या का आत्मबलिदान

अध्याय 160

नन्हे बालक की निर्दोष वाणी और कुन्ती का आगमन

अध्याय 161

कुन्ती का आश्वासन

अध्याय 162

विप्र का संकोच और भीम के बल का रहस्य

अध्याय 163

एकचक्रा नगरी का भयमुक्त होना

अध्याय 164

प्रवासी ब्राह्मण का आगमन और पाञ्चाल-चर्चा

अध्याय 165

धृष्टद्युम्न और द्रौपदी का प्राकट्य

अध्याय 166

कुन्ती का पाञ्चाल जाने का प्रस्ताव

अध्याय 167

महर्षि व्यास का आगमन और द्रौपदी का पूर्वजन्म

अध्याय 168

पाण्डवों का पाञ्चाल की ओर प्रस्थान

अध्याय 169

संवरण की तपस्या और वसिष्ठ जी का सूर्यलोक गमन

अध्याय 170

संवरण और तपती का पाणिग्रहण

अध्याय 171

शक्ति द्वारा कल्माषपाद को शाप

अध्याय 172

कल्माषपाद का राक्षस भाव और वसिष्ठ-पुत्रों का संहार

अध्याय 173

वसिष्ठ का अपार शोक और गर्भस्थ पराशर की ध्वनि

अध्याय 174

कल्माषपाद की शापमुक्ति

अध्याय 175

वसिष्ठ-शोक और कल्माषपाद का शाप

अध्याय 176

पराशर का गर्भ में आगमन और शाप-मुक्ति

अध्याय 177

राजा कल्माषपाद की वंश-वृद्धि

अध्याय 178

पराशर का क्रोध और और्व-उपाख्यान

अध्याय 179

महर्षि और्व और बड़वानल की कथा

अध्याय 180

पराशर का राक्षस-सत्र और पुरोहित का महत्त्व

अध्याय 181

कुंती का अनजाने में दिया गया वचन

अध्याय 182

श्रीकृष्ण और बलराम का आगमन

अध्याय 183

कुम्हार की शाला में रात्रि और धृष्टद्युम्न की गुप्त दृष्टि

अध्याय 184

धृष्टद्युम्न द्वारा राजा द्रुपद को विवरण

अध्याय 185

द्रुपद के पुरोहित का आगमन

अध्याय 186

पांडवों का राजमहल में आगमन और परीक्षा

अध्याय 187

द्रुपद द्वारा पुरोहित का प्रेषण

अध्याय 188

पुरोहित और युधिष्ठिर का संवाद

अध्याय 189

पांडवों का राजभवन में प्रवेश और परीक्षा

अध्याय 190

पांडवों के यथार्थ स्वरूप का प्रकटीकरण

अध्याय 191

द्रौपदी के विवाह पर विचार और द्रुपद का संशय

अध्याय 192

महर्षि व्यास का शुभागमन

अध्याय 193

पाण्डवों का विवाह-सम्पन्न और उपहार-प्राप्ति

अध्याय 194

दुर्योधन की हस्तिनापुर वापसी और धृतराष्ट्र का सम्भ्रम

अध्याय 195

दुर्योधन के कुटिल प्रस्ताव

अध्याय 196

कर्ण का युद्ध-प्रस्ताव

अध्याय 197

भीष्म पितामह का न्यायपूर्ण परामर्श

अध्याय 198

द्रोण और विदुर का भीष्म-समर्थन और कर्ण का विरोध

अध्याय 199

देवर्षि नारद का आगमन

अध्याय 200

सुन्द और उपसुन्द की तपस्या

अध्याय 201

दैत्यों का अत्याचार और त्राहि-त्राहि

अध्याय 202

तिलोत्तमा की सृष्टि

अध्याय 203

सुन्द-उपसुन्द का संहार

अध्याय 204

पांडवों का समय-नियम

अध्याय 205

नारद जी का आगमन और सुन्द-उपसुन्द की कथा का आरम्भ

अध्याय 206

सुन्द और उपसुन्द की कठोर तपस्या

अध्याय 207

सुन्द-उपसुन्द का त्रिलोकी पर अत्याचार

अध्याय 208

तिलोत्तमा की सृष्टि

अध्याय 209

सुन्द और उपसुन्द का विनाश

अध्याय 210

पाण्डवों का नियम-निर्धारण

अध्याय 211

प्रभास क्षेत्र में श्रीकृष्ण और अर्जुन का मिलन

अध्याय 212

रैवतक पर्वत पर सुभद्रा का दर्शन

अध्याय 213

सुभद्रा का हरण

अध्याय 214

सुधर्मा सभा में श्रीकृष्ण का समाधान

अध्याय 215

इन्द्रप्रस्थ आगमन और अभिनन्दन

अध्याय 216

यमुना तट पर विहार और अग्निदेव का आगमन

अध्याय 217

राजा श्वेतकि की कथा और अग्निदेव का मन्दाग्नि रोग

अध्याय 218

अग्निदेव की याचना और अर्जुन की दिव्य अस्त्रों की मांग

अध्याय 219

गाण्डीव धनुष और सुदर्शन चक्र की प्राप्ति

अध्याय 220

खाण्डववन का प्रज्वलन और संहार का आरम्भ

अध्याय 221

वन-प्राणियों की व्याकुलता और संहार

अध्याय 222

देवराज इन्द्र का आक्रमण और अर्जुन का शर-पञ्जर

अध्याय 223

शार्ङ्गक शिशुओं द्वारा अग्निदेव की स्तुति

अध्याय 224

अग्निदेव द्वारा शार्ङ्गक पक्षियों को अभयदान

अध्याय 225

मंदपाल की चिंता और लपिता की ईर्ष्या

अध्याय 226

मंदपाल का परिवार से मिलन और जरीता का मान

अध्याय 227

इंद्र द्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुन को वरदान

अध्याय 228

मय दानव की कृतज्ञता और आदिपर्व की समाप्ति

अध्याय 229

ऋषि मन्दपाल और शार्ङ्गक पक्षियों की कथा

अध्याय 230

जरीता का विलाप और नन्हे पक्षियों का संकट

अध्याय 231

मूषक के बिल का प्रस्ताव और नन्हें पक्षियों का तर्क

अध्याय 232

पक्षियों का माता को विदा करना

अध्याय 233

नन्हे पक्षियों द्वारा अग्निदेव की स्तुति

अध्याय 234

अग्नि द्वारा पक्षियों की रक्षा और परिवार का मिलन

अध्याय 235

मन्दपाल का परिवार से मिलन

अध्याय 236

खाण्डव दाह का समापन और आदिपर्व की पूर्णता

सामग्री

Adhyayas not published yet

This level continues as Adhyaya › Episode. Those entries appear only once real published material exists — nothing is invented to fill the gap.

Editors can attach works, chapters, episodes and other entries to this category from Content Studio.