स्मृति · इतिहास · महाभारत

शान्तिपर्व

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अध्याय

353 अध्याय — पढ़ें और सुनें

अध्याय 1

युधिष्ठिर का शोक

अध्याय 2

युद्धभूमि की ओर प्रस्थान

अध्याय 3

युधिष्ठिर के प्रश्न

अध्याय 4

ज्ञान का पथ

अध्याय 5

राजधर्म का स्वरूप

अध्याय 6

धर्म का मूल

अध्याय 7

वर्णधर्म की मर्यादा

अध्याय 8

शासक का भार

अध्याय 9

राज्याभिषेक की उत्पत्ति

अध्याय 10

दंड-नीति का विधान

अध्याय 11

मंत्री और सहायक की योग्यता

अध्याय 12

दुर्बलता और उसके दोष

अध्याय 13

कालचक्र और समृद्धि

अध्याय 14

मानवीय द्वंद्व के मूल

अध्याय 15

रक्षा और उत्तरदायित्व

अध्याय 16

राजधर्म का सार

अध्याय 17

न्यायपूर्ण शासन का स्वरूप

अध्याय 18

धर्म की सर्वोच्चता

अध्याय 19

आत्म-नियंत्रण का महत्व

अध्याय 20

मंत्रणा का बल

अध्याय 21

अकर्मण्यता का दोष

अध्याय 22

राजनीति का शास्त्र

अध्याय 23

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 24

धर्म का सेवक राजा

अध्याय 25

काल का स्वरूप

अध्याय 26

दुख का मूल कारण

अध्याय 27

जीवन में समत्व

अध्याय 28

धर्म की सर्वोपरिता

अध्याय 29

कर्म और ज्ञान का द्वैत

अध्याय 30

दण्ड-नीति की आवश्यकता

अध्याय 31

एक प्रबुद्ध राजा के गुण

अध्याय 32

त्याग और राजधर्म

अध्याय 33

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 34

अज्ञान का मूल कारण

अध्याय 35

अहिंसा का सूक्ष्म धर्म

अध्याय 36

मन का निग्रह

अध्याय 37

काम और लोभ का विनाश

अध्याय 38

समभाव की महिमा

अध्याय 39

धर्म का सूक्ष्म आधार

अध्याय 40

राजधर्म और प्रजा का पालन

अध्याय 41

आसक्ति के बंधन

अध्याय 42

राजधर्म का दायित्व

अध्याय 43

आत्म-नियंत्रण का मार्ग

अध्याय 44

मोक्ष का स्वरूप

अध्याय 45

राजधर्म की उत्पत्ति

अध्याय 46

सतर्कता का गुण

अध्याय 47

राजा का आचरण

अध्याय 48

राज्य की शक्ति और रक्षा

अध्याय 49

दंड और सामाजिक व्यवस्था

अध्याय 50

राजा का कर्तव्य और व्यवहार

अध्याय 51

कूटनीति और रणनीतिक कौशल

अध्याय 52

समृद्धि का मूल आधार

अध्याय 53

दंड की उत्पत्ति

अध्याय 54

अराजकता का भयावह परिणाम

अध्याय 55

राजा ही समय का कारण है

अध्याय 56

राजा के व्यक्तिगत गुण

अध्याय 57

प्रजापालन और राजधर्म

अध्याय 58

मंत्रियों का महत्त्व और चयन

अध्याय 59

आंतरिक शत्रुओं का निवारण

अध्याय 60

धर्मात्मा राजा का आचरण

अध्याय 61

राज्य-संचालन में आपत्तियाँ

अध्याय 62

दण्ड-नीति का रहस्य

अध्याय 63

मंत्रियों के साथ समन्वय

अध्याय 64

राजा का सदाचारी मार्ग

अध्याय 65

अकर्मण्यता का भय

अध्याय 66

राज-कर्मचारियों का चयन

अध्याय 67

युद्ध और कूटनीति का धर्म

अध्याय 68

प्रजा के प्रति राजा का कर्तव्य

अध्याय 69

राजा का व्यक्तिगत आचरण

अध्याय 70

प्रजा की सुरक्षा का दायित्व

अध्याय 71

न्याय और शासन व्यवस्था

अध्याय 72

संप्रभुता का भार

अध्याय 73

शासन में शिथिलता के खतरे

अध्याय 74

मंत्रियों का महत्त्व

अध्याय 75

राजस्व का आधार

अध्याय 76

बाह्य शत्रुओं के विरुद्ध रणनीति

अध्याय 77

कूटनीति और गुप्तचर व्यवस्था

अध्याय 78

आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था

अध्याय 79

राजकीय अधिकारियों का आचरण

अध्याय 80

युद्ध और शांति की नैतिकता

अध्याय 81

आपद्धर्म का स्वरूप

अध्याय 82

राजधर्म का आचरण

अध्याय 83

न्याय का महत्त्व

अध्याय 84

शासन में धैर्य और विवेक

अध्याय 85

पक्षपात और अनीति का त्याग

अध्याय 86

मंत्रणा और सुयोग्य परामर्श का महत्व

अध्याय 87

राजा की चारित्रिक दृढ़ता और शक्ति

अध्याय 88

अनाथ और असहायों की सुरक्षा का धर्म

अध्याय 89

दण्डनीति का स्वरूप

अध्याय 90

मंत्रियों के गुण और चयन

अध्याय 91

कूटनीति और सामरिक दृष्टिकोण

अध्याय 92

मोक्ष का मार्ग और चिंतन

अध्याय 93

समस्त दुखों का मूल

अध्याय 94

ज्ञानी का आचरण

अध्याय 95

राजसत्ता का उत्तरदायित्व

अध्याय 96

सुनने की कला

अध्याय 97

ऐश्वर्य का संकट

अध्याय 98

मित्रता की कसौटी

अध्याय 99

रक्षा का धर्म

अध्याय 100

वैराग्य की ओर

अध्याय 101

दोषों का मूल

अध्याय 102

क्षमा का बल

अध्याय 103

राजस्व और धर्म

अध्याय 104

गुप्त मंत्रणा की मर्यादा

अध्याय 105

राजधर्म का आचरण

अध्याय 106

युद्ध और शांति की नीति

अध्याय 107

राज्य की समृद्धि

अध्याय 108

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 109

प्रजापालन और रक्षक का धर्म

अध्याय 110

सत्य और सदाचार का बल

अध्याय 111

कूटनीति और सामरिक कौशल

अध्याय 112

दान और उदारता का महत्व

अध्याय 113

अत्यधिक मोह का त्याग

अध्याय 114

आदर्श मंत्री और परामर्शदाता

अध्याय 115

न्याय और दण्ड नीति का स्वरूप

अध्याय 116

इन्द्रिय विजय और त्याग

अध्याय 117

अहंकार और क्रोध का विनाश

अध्याय 118

विपत्ति में धैर्य और विवेक

अध्याय 119

दीन-दुखियों की रक्षा का धर्म

अध्याय 120

मुक्ति के विविध मार्ग

अध्याय 121

सदाचार और धर्म का स्वरूप

अध्याय 122

दान और उदारता का महत्त्व

अध्याय 123

क्षमा और धैर्य का प्रभाव

अध्याय 124

आत्म-संयम और सत्य का मार्ग

अध्याय 125

अहंकार और गर्व का त्याग

अध्याय 126

मौन की महिमा

अध्याय 127

मित्र की परख और मित्रता का धर्म

अध्याय 128

इंद्रिय-विजय का महात्म्य

अध्याय 129

सत्कर्मों का फल

अध्याय 130

दान का महत्व

अध्याय 131

संन्यास और त्याग का मार्ग

अध्याय 132

जीवन में समत्व भाव

अध्याय 133

अहंकार और क्रोध का विनाश

अध्याय 134

क्षमा का अद्भुत प्रभाव

अध्याय 135

ज्ञान और विवेक का प्रकाश

अध्याय 136

वैराग्य का मार्ग

अध्याय 137

धर्म का स्वरूप

अध्याय 138

कर्म और उसके फल

अध्याय 139

आत्म-संयम का महत्त्व

अध्याय 140

निष्काम शासन का मार्ग

अध्याय 141

सदाचार और धर्म का महत्त्व

अध्याय 142

लोभ और अज्ञान का त्याग

अध्याय 143

क्षमा का बल और महत्ता

अध्याय 144

दान और त्याग की महिमा

अध्याय 145

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 146

कर्मों का फल और आत्म-चिंतन

अध्याय 147

त्याग और ज्ञान का मार्ग

अध्याय 148

धर्मात्मा राजा का आचरण

अध्याय 149

आसक्ति के दोष

अध्याय 150

वाणी का संयम

अध्याय 151

धर्म का स्वरूप

अध्याय 152

इन्द्रिय संयम का महत्व

अध्याय 153

कर्मों का फल

अध्याय 154

काल का स्वरूप

अध्याय 155

धर्म का बल

अध्याय 156

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 157

आसक्ति का संकट

अध्याय 158

सदाचार का स्वरूप

अध्याय 159

क्षमा का बल

अध्याय 160

मुक्ति का मार्ग

अध्याय 161

कर्मों का फल

अध्याय 162

धैर्य का महत्व

अध्याय 163

काल का स्वरूप

अध्याय 164

त्याग का मार्ग

अध्याय 165

ज्ञान का स्वरूप

अध्याय 166

आत्म-संयम का फल

अध्याय 167

सदाचार की महिमा

अध्याय 168

दान की महत्ता

अध्याय 169

सत्य का फल

अध्याय 170

अहिंसा का महत्त्व

अध्याय 171

क्षमा का बल

अध्याय 172

विनय का स्वभाव

अध्याय 173

काल की गति

अध्याय 174

धैर्य का महत्व

अध्याय 175

क्रोध पर विजय

अध्याय 176

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 177

धर्म का स्वरूप

अध्याय 178

कर्मफल का रहस्य

अध्याय 179

सत्य का प्रभाव

अध्याय 180

रक्षा और दायित्व

अध्याय 181

राजधर्म की उत्पत्ति

अध्याय 182

दण्ड की महत्ता

अध्याय 183

राजा राज्य की आत्मा

अध्याय 184

शासन के उत्तरदायित्व

अध्याय 185

धर्म का विकास

अध्याय 186

राजधर्म का स्वरूप

अध्याय 187

न्याय और शासन व्यवस्था

अध्याय 188

राजा एक संरक्षक के रूप में

अध्याय 189

राज्य की उत्पत्ति

अध्याय 190

वेन और पृथु की कथा

अध्याय 191

दंड का महत्व

अध्याय 192

राजा के सद्गुण

अध्याय 193

शिथिलता के दुष्परिणाम

अध्याय 194

धर्मसम्मत शासन का महत्त्व

अध्याय 195

विद्वानों का सम्मान और राजधर्म

अध्याय 196

आत्म-नियंत्रण का मार्ग

अध्याय 197

धर्म का फल

अध्याय 198

काल और भाग्य की महिमा

अध्याय 199

विवेक और आचरण का परामर्श

अध्याय 200

धर्म की सर्वोपरिता

अध्याय 201

तप और आचरण का फल

अध्याय 202

सत्य की महिमा

अध्याय 203

न्यायपूर्ण शासन की प्रकृति

अध्याय 204

मन पर विजय

अध्याय 205

कर्म और भाग्य का फल

अध्याय 206

काल और ज्ञान का महत्त्व

अध्याय 207

कर्तव्य के भीतर वैराग्य

अध्याय 208

विद्वान राजा का आचरण

अध्याय 209

आसक्ति का संकट

अध्याय 210

जीवन की क्षणभंगुरता

अध्याय 211

ज्ञान ही परम धन

अध्याय 212

धर्माचरण और शासन की धुरी

अध्याय 213

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 214

समस्त अस्तित्व का मूल

अध्याय 215

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 216

धर्माचरण का शुभ फल

अध्याय 217

तप का फल

अध्याय 218

धर्म का स्वरूप

अध्याय 219

क्षमा का बल

अध्याय 220

दान का महात्म्य

अध्याय 221

सत्य का फल

अध्याय 222

धर्मात्माओं का आचरण

अध्याय 223

क्षमा का प्रभाव

अध्याय 224

मन और बुद्धि का स्वरूप

अध्याय 225

जीव का स्वरूप

अध्याय 226

शोक का कारण

अध्याय 227

ज्ञान का मार्ग

अध्याय 228

काल का प्रभाव

अध्याय 229

धर्म का स्वरूप

अध्याय 230

कर्म का फल

अध्याय 231

काल की गति

अध्याय 232

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 233

शुभ और अशुभ कर्मों का फल

अध्याय 234

प्राणियों का स्वभाव

अध्याय 235

सत्य और दान का महत्व

अध्याय 236

राजा का आचरण

अध्याय 237

कर्मों का फल

अध्याय 238

धर्म का स्वरूप

अध्याय 239

इन्द्रिय संयम का महत्व

अध्याय 240

मुक्ति का मार्ग

अध्याय 241

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 242

क्षमा और धैर्य का महत्व

अध्याय 243

जीवन की क्षणभंगुरता

अध्याय 244

धर्मज्ञ राजा का आचरण

अध्याय 245

कर्म और ज्ञान का फल

अध्याय 246

धर्म का सूक्ष्म स्वरूप

अध्याय 247

काल का प्रभाव

अध्याय 248

आत्म-चिन्तन का मार्ग

अध्याय 249

आसक्ति के खतरे

अध्याय 250

मन और बुद्धि का स्वरूप

अध्याय 251

संयमी का आचरण

अध्याय 252

मुक्ति का मार्ग

अध्याय 253

कर्म और ज्ञान का फल

अध्याय 254

दुःख का स्वरूप

अध्याय 255

नश्वर संसार

अध्याय 256

आत्म-नियंत्रण का मार्ग

अध्याय 257

कामनाओं का स्वरूप

अध्याय 258

पुण्य और पाप का फल

अध्याय 259

ज्ञान का बल

अध्याय 260

कर्म में संन्यास

अध्याय 261

आसक्ति का संकट

अध्याय 262

प्राणियों का स्वभाव

अध्याय 263

काल का चक्र

अध्याय 264

मोक्ष का मार्ग

अध्याय 265

कर्मों का फल

अध्याय 266

मन और बुद्धि का स्वरूप

अध्याय 267

आत्म-संयम का पथ

अध्याय 268

संसार की अनित्यता

अध्याय 269

कामनाओं का संकट

अध्याय 270

धर्म का स्वरूप

अध्याय 271

ज्ञान का फल

अध्याय 272

भक्ति का मार्ग

अध्याय 273

कर्मों का फल

अध्याय 274

विवेक का स्वभाव

अध्याय 275

क्षमा का बल

अध्याय 276

काल का चक्र

अध्याय 277

धर्म का स्वरूप

अध्याय 278

इंद्रिय-निग्रह का महत्त्व

अध्याय 279

दान की महिमा

अध्याय 280

मोक्ष का मार्ग

अध्याय 281

कर्मों का फल

अध्याय 282

ज्ञान का स्वरूप

अध्याय 283

आत्म-नियंत्रण का पथ

अध्याय 284

मौन का महत्त्व

अध्याय 285

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 286

सत्संगति और मित्रता का महत्त्व

अध्याय 287

वैराग्य और मानसिक स्पष्टता

अध्याय 288

आत्म-साक्षात्कार का पथ

अध्याय 289

धर्म का स्वरूप

अध्याय 290

कर्म-फल का सिद्धांत

अध्याय 291

क्षमा का बल

अध्याय 292

त्याग का महत्त्व

अध्याय 293

आसक्ति के खतरे

अध्याय 294

अनित्यता का स्वरूप

अध्याय 295

आत्मज्ञान का मार्ग

अध्याय 296

धर्म का फल

अध्याय 297

मन और बुद्धि का स्वरूप

अध्याय 298

सत्य ज्ञान का फल

अध्याय 299

त्याग का मार्ग

अध्याय 300

शासन का शाश्वत धर्म

अध्याय 301

विद्वान राजा का आचरण

अध्याय 302

धन और धर्म का विवेक

अध्याय 303

क्षमा और धैर्य का बल

अध्याय 304

मुक्ति का वास्तविक स्वरूप

अध्याय 305

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 306

आत्म-संयम की महिमा

अध्याय 307

प्रजा और राज्य के प्रति कर्तव्य

अध्याय 308

परम मुक्ति का मार्ग

अध्याय 309

कर्म और ज्ञान का फल

अध्याय 310

सदाचार और मर्यादा का स्वरूप

अध्याय 311

आत्म-नियंत्रण का मार्ग

अध्याय 312

राजधर्म का पारमार्थिक उद्देश्य

अध्याय 313

मोक्षधर्म का उपदेश

अध्याय 314

ईश्वरीय चेतना का स्वरूप

अध्याय 315

संन्यास और भक्ति का मार्ग

अध्याय 316

धर्म का फल और परलोक

अध्याय 317

आत्म-संयम का मार्ग

अध्याय 318

धर्म का सूक्ष्म स्वरूप

अध्याय 319

कर्मफल का रहस्य

अध्याय 320

मोक्ष की पराकाष्ठा

अध्याय 321

काल और नियति का स्वरूप

अध्याय 322

बुद्धिमान शासक के लक्षण

अध्याय 323

आत्म-ज्ञान की प्राप्ति

अध्याय 324

धर्म की पराकाष्ठा

अध्याय 325

ज्ञान और त्याग का द्वैत

अध्याय 326

काल का धर्म पर प्रभाव

अध्याय 327

सत्ता में रहकर वैराग्य का बोध

अध्याय 328

धर्म और योग का समन्वय

अध्याय 329

दिव्य दृष्टि का स्वरूप

अध्याय 330

एकल सत्य की अवधारणा

अध्याय 331

सदाचारी कर्म का फल

अध्याय 332

मोक्ष का अंतिम मार्ग

अध्याय 333

नारायण की महिमा

अध्याय 334

परम ब्रह्म का स्वरूप

अध्याय 335

इंद्रिय संयम की शिक्षा

अध्याय 336

दिव्य अवतारों का वर्णन

अध्याय 337

प्रभु का परमतत्व स्वरूप

अध्याय 338

निष्काम भक्ति का मार्ग

अध्याय 339

ज्ञान की पूर्णता

अध्याय 340

नारायण महिमा का वर्णन

अध्याय 341

भक्ति और ज्ञान का समन्वय

अध्याय 342

सदाचार और सत्कर्म का फल

अध्याय 343

महाप्रस्थान की ओर प्रवृत्त

अध्याय 344

नारायण की सर्वोपरिता

अध्याय 345

दैवी कृपा का स्वरूप

अध्याय 346

आत्म-साक्षात्कार का मार्ग

अध्याय 347

भीष्म के अंतिम उपदेश

अध्याय 348

नारायण महिमा

अध्याय 349

दैवी ज्ञान का स्वरूप

अध्याय 350

धर्म की सर्वोपरिता

अध्याय 351

महाप्रस्थान और उपसंहार

अध्याय 352

ज्ञान का चरमोत्कर्ष

अध्याय 353

महाप्रस्थान का क्षण

सामग्री

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